नीति आयोग (NITI Aayog) के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा है कि अब समय आ गया है कि भारत की खेती केवल ज्यादा उत्पादन करने तक सीमित न रहे। अब खेती को तकनीक आधारित, ज्यादा मुनाफे वाली और वैश्विक बाजार से जुड़ी कृषि व्यवस्था बनाने की जरूरत है।
दिल्ली में भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत अब खाद्यान्न की कमी वाले दौर से बाहर निकल चुका है। इसलिए अब सरकार और किसानों का ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उत्पादकता, किसानों की आय और निर्यात बढ़ाने पर होना चाहिए।
किसान सिर्फ किसान नहीं, बिजनेसमैन भी बनें
अशोक लाहिड़ी ने कहा कि किसानों को बदलती बाजार की मांग को समझना होगा। उन्हें केवल गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि बाजार में किस चीज की ज्यादा मांग है।
उन्होंने कहा कि किसान अगर अपनी खेती को कारोबार की तरह चलाएंगे और बाजार की जरूरत के हिसाब से फसल चुनेंगे, तो उनकी कमाई बढ़ सकती है।
आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि भारत में कई फसलों की प्रति एकड़ पैदावार अभी भी दुनिया के कई देशों से कम है। इसे बढ़ाने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा।
उन्होंने जिन तकनीकों पर जोर दिया, उनमें शामिल हैं:
- उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज
- प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती)
- उर्वरक और पानी का संतुलित उपयोग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- ड्रोन
- रिमोट सेंसिंग
- सैटेलाइट तकनीक
उनका कहना है कि इन तकनीकों से उत्पादन बढ़ेगा, लागत कम होगी और खेती अधिक लाभदायक बनेगी।
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धान-गेहूं से आगे बढ़ने की जरूरत
लाहिड़ी ने कहा कि अब किसानों को सिर्फ अनाज पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें फल, सब्जियां, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, बकरी पालन और एग्रोफॉरेस्ट्री जैसी ज्यादा कमाई वाली गतिविधियों की ओर भी बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोगों की आय बढ़ने के साथ दूध, फल, अंडे, मछली, मांस और प्रोसेस्ड फूड की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए किसानों को भी उसी हिसाब से उत्पादन करना चाहिए।
उर्वरकों का असंतुलित इस्तेमाल चिंता का विषय
अशोक लाहिड़ी ने कहा कि भारत में उर्वरकों का संतुलित उपयोग नहीं हो रहा है।
उन्होंने बताया कि देश में नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश (NPK) का औसत अनुपात 9.8:3.7:1 है, जबकि सही अनुपात 4:2:1 होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यूरिया सस्ता होने के कारण किसान उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है और फसलों की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है। इस समस्या का जल्द समाधान जरूरी है।
भारतीय कृषि उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाना होगा
लाहिड़ी ने कहा कि भारत दुनिया के बेहतरीन आम पैदा करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की मौजूदगी अभी भी सीमित है।
उन्होंने कहा कि भारत को अपने उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाना होगा, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।
सिर्फ कच्चा माल नहीं, वैल्यू एडिशन भी जरूरी
उन्होंने कहा कि किसानों को केवल कच्चा कृषि उत्पाद बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग पर भी ध्यान देना चाहिए।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर अनानास को सीधे बेचने के बजाय उसका जूस, कटे हुए फल या अन्य तैयार उत्पाद बनाए जाएं, तो किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलेगा। इससे रोजगार भी बढ़ेगा और फसल की बर्बादी भी कम होगी।
हर साल अरबों डॉलर की फसल होती है बर्बाद
उन्होंने बताया कि भारत में हर साल कृषि उत्पादों की बर्बादी से लगभग 18.5 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
फल और सब्जियों की 15 से 18 प्रतिशत तक फसल बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती है।
उन्होंने कहा कि इस नुकसान को कम करने के लिए कोल्ड स्टोरेज और बेहतर सप्लाई चेन पर निवेश बढ़ाना जरूरी है।
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FPO को मजबूत बनाने पर जोर
लाहिड़ी ने कहा कि छोटे किसानों के पास पूंजी, बाजार और जानकारी की कमी होती है।
ऐसे में किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों को अच्छी गुणवत्ता के इनपुट, बेहतर बाजार और सामूहिक बिक्री की सुविधा देकर उनकी आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
जलवायु के अनुसार खेती अपनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि अब खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुसार भी बदलना होगा।
उन्होंने सोलर पंपों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसानों को अतिरिक्त बिजली बेचने की सुविधा मिले, तो वे भूजल का कम इस्तेमाल करेंगे और पानी की बचत भी होगी।
डिजिटल तकनीक से बदलेगी खेती
लाहिड़ी ने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर खेती को नई दिशा दे सकता है।
AI, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), सैटेलाइट और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी तकनीकें खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और जलवायु जोखिम से निपटने में मदद करेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की नई योजनाएं, खाद्य प्रसंस्करण में निवेश और फल, सब्जी, दलहन, नारियल व काजू जैसे मिशन भविष्य की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। साथ ही किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए कृषि विस्तार सेवाओं (Extension Services) को भी और मजबूत करने की जरूरत है।





