राजस्थान सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे 31 जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अपनी खरीफ फसलों का बीमा जरूर करा लें। इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और खराब मौसम से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। राज्य के 41 जिलों में खरीफ फसलों का बीमा किया जाएगा।
14 फसलें योजना में शामिल
इस बार योजना के तहत बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, चंवला, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास और मूंगफली समेत 14 खरीफ फसलों को शामिल किया गया है। इन फसलों के लिए बीमा इकाई क्षेत्र तहसील और पटवार मंडल तय किए गए हैं।
कौन करा सकता है बीमा?
यह योजना पूरी तरह स्वैच्छिक है। लोन लेने वाले, बिना लोन वाले और पात्र बंटाईदार किसान सभी अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकते हैं। बिना लोन वाले किसान 31 जुलाई 2026 तक बैंक, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), अधिकृत बीमा एजेंट या राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
सिर्फ 2% प्रीमियम देना होगा
योजना के तहत खरीफ फसलों के लिए किसानों को बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। रबी फसलों के लिए यह 1.5 प्रतिशत और बागवानी व व्यावसायिक फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया है। इससे अधिक प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी।
किन परिस्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ?
फसल बीमा योजना के तहत सूखा, कम बारिश, लंबी शुष्क अवधि, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग, भूस्खलन, बिजली गिरने से प्राकृतिक आग, तूफान, चक्रवात और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर किया गया है।
इसके अलावा, कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को बेमौसम बारिश, चक्रवात या ओलावृष्टि से नुकसान होने पर 14 दिन तक बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
बुवाई नहीं होने पर भी मिलेगा मुआवजा
अगर कम बारिश या खराब मौसम के कारण किसी अधिसूचित क्षेत्र में 75 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाती, तो पात्र किसानों को बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।
72 घंटे के भीतर देनी होगी सूचना
अगर फसल को नुकसान होता है तो किसान को 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप, संबंधित बैंक या कृषि विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। यदि किसी कारण से समय पर सूचना नहीं दी जा सके, तो अधिकतम 7 दिन के भीतर बीमा कंपनी को पूरा विवरण देना होगा।
क्लेम की राशि सीधे खाते में आएगी
राज्य के 41 जिलों को आठ क्लस्टर में बांटकर चार बीमा कंपनियों को योजना लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। पात्र किसानों के बीमा क्लेम की राशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। वहीं, कटाई के बाद हुए नुकसान के मामलों में संयुक्त समिति की रिपोर्ट मिलने के 15 दिन के भीतर भुगतान किया जाएगा।





