बिहार में किसानों को खेती से अच्छी कमाई का एक और विकल्प देने के लिए ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को पौध खरीदने से लेकर खेती की शुरुआती जरूरतों तक के लिए सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी जाएगी। योजना का मकसद राज्य में खाद्य तेल का उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आमदनी बढ़ाना और खेती से जुड़े नए रोजगार के मौके तैयार करना है।
क्या है ऑयल पाम ?
ऑयल पाम एक ऐसा पेड़ है जिसके फल से पाम ऑयल निकाला जाता है। इस तेल का इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों के अलावा बेकरी उत्पाद, कॉस्मेटिक्स और कई उद्योगों में होता है। यह एक बहुवर्षीय फसल है। पौधे लगाने के करीब 25 से 30 साल तक इससे उत्पादन लिया जा सकता है।
बिहार में फिलहाल अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों को ऑयल पाम की खेती के लिए उपयुक्त माना गया है।
कितनी आर्थिक मदद मिलेगी?
इस योजना के तहत किसानों को 10 हजार से 29 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। वहीं, पौध सामग्री खरीदने के लिए 29 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की मदद दी जाएगी।
पौधे लगाने के बाद शुरुआती चार साल तक फसल के रखरखाव और अंतरवर्ती फसलों की खेती के लिए भी 10,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का विशेष अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई प्रणाली और कटाई व प्रसंस्करण से जुड़े कृषि यंत्रों पर भी अनुदान का प्रावधान है।
कैसे कर सकते हैं आवेदन?
ऑयल पाम की खेती शुरू करने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी जिला उद्यान कार्यालय या प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। योजना से जुड़ी जानकारी विभागीय पोर्टल और बिहार कृषि ऐप के जरिए भी ली जा सकती है।
आवेदन के लिए किसान के पास आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो और ई-मेल आईडी जैसे दस्तावेज होने चाहिए।





