भोपाल: मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार का कहना है कि देशभर में मूंग खरीद के लिए मंजूर कुल मात्रा का सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया गया है, वहीं दूसरी ओर किसान संगठन आरोप लगा रहे हैं कि जमीनी स्तर पर खरीद बेहद धीमी है और खरीदी पिछले सालों के तुलना में प्रति किसानों से कम की जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा और उससे जुड़े 13 किसान संगठनों ने सोमवार 27 जुलाई को नर्मदापुरम से भोपाल तक किसान पदयात्रा निकालने की कोशिश की। किसानों की मांग है कि मूंग की 100 फीसदी उपज MSP पर खरीदी जाए। इसके साथ ही किसानों को मांग के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जाए और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
केंद्र सरकार कि PM-AASHA योजना के तहत तूर, उड़द और मसूर की 100 फीसदी खरीद का प्रावधान है, जबकि मूंग समेत अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 फीसदी तक की जा सकती है।
केंद्र सरकार के अनुसार, ग्रीष्मकालीन सीजन 2025-26 में देशभर में मूंग खरीद के लिए 5.23 लाख मीट्रिक टन की मंजूरी दी गई है। इसमें से अकेले मध्य प्रदेश को 4.54 लाख मीट्रिक टन से अधिक, यानी कुल स्वीकृत मात्रा का करीब 87 फीसदी हिस्सा मिला है। इसके बावजूद केंद्र को मिले आंकड़ों के अनुसार 16 जुलाई 2026 तक प्रदेश में केवल 7,947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो सकी है। इससे करीब 12 हजार किसानों को लाभ मिला है, जो प्रदेश के लिए मंजूर कुल खरीद सीमा का लगभग 2 फीसदी है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि पिछले ग्रीष्मकालीन सीजन 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4,19,692 मीट्रिक टन मूंग खरीद की मंजूरी दी गई थी। इसके मुकाबले 3,93,123.79 मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई थी। इस खरीद पर करीब 3,413.10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया और 1,22,776 किसानों को इसका लाभ मिला।
हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि सरकारी आंकड़े और जमीनी हालात अलग हैं। आम किसान यूनियन के नेता केदार सिरोही का आरोप है कि सरकार किसानों की पूरी उपज की तो बात ही छोड़िये, सरकार प्रति किसान पहले से भी कम खरीदी कर रही है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में अधिकांश किसानों को अपनी बची हुई मूंग खुले बाजार में MSP से कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि हर किसान की 100 फीसदी मूंग MSP पर खरीदी जाए और खरीद की सीमा समाप्त की जाए।
मूंग खरीदी के अलावा किसानों ने खाद की उपलब्धता को भी बड़ा मुद्दा बनाया है। सिरोही का आरोप है कि सरकार खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही है, लेकिन किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही। उन्होंने प्रदेश में खाद की कालाबाजारी होने का भी आरोप लगाया और कहा कि जब खाद की मांग बढ़ी है और उत्पादन और आयात दोनों कम हुए हैं, तब पर्याप्त उपलब्धता का दावा समझ से परे है।
किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसानों से प्रीमियम तो लिया जाता है, लेकिन कई किसानों को मुआवजे के नाम पर प्रति एकड़ केवल 80 से 100 रुपये ही मिले हैं। उनका आरोप है कि योजना का लाभ किसानों तक सही तरीके से नहीं पहुंच रहा।
आम किसान यूनियन के नेता राम इनानिया ने खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और फसल बीमा योजना को अधिक सरल व पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पदयात्रा में शामिल होने जा रहे किसानों को कई जगह पुलिस रोक रही है। हालांकि उनका कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और आंदोलन जारी रहेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा और उससे जुड़े किसान संगठनों ने प्रदेश के किसानों, खेत मजदूरों और किसान हितैषी नागरिकों से 27 जुलाई की पदयात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ मूंग खरीदी का नहीं, बल्कि किसानों से जुड़े कई लंबित मुद्दों के समाधान की लड़ाई भी है।
एमपी में मूंग खरीदी को लेकर आंदोलन, सबसे ज्यादा कोटा मिलने के बावजूद खरीद 2% पर अटकी
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। किसान 100% MSP पर मूंग खरीद, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और फसल बीमा योजना में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं, केंद्र के अनुसार प्रदेश को देश में सबसे अधिक 87% खरीद का कोटा मिला है, लेकिन 16 जुलाई तक सिर्फ 2% मूंग की ही सरकारी खरीद हो सकी है।
Pooja Rai·27 Jul 2026

मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। किसान 100% MSP पर मूंग खरीद, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और फसल बीमा योजना में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

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