देश में खरीफ फसलों की बुवाई लगातार रफ्तार पकड़ रही है। 17 जुलाई 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर पहुंच गई है। इस समय धान का रकबा पिछले साल की तुलना में सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम है, जिससे इस सीजन में अच्छे धान उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई है।
खरीफ बुवाई में तेजी
17 जुलाई तक देश में करीब 6.58 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 6 प्रतिशत कम है। हालांकि 10 जुलाई तक यह अंतर करीब16 प्रतिशत था। यानी सिर्फ एक सप्ताह में बुवाई में अच्छी तेजी देखने को मिली है।
कम बारिश के बावजूद किसानों ने जारी रखी बुवाई
जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही। इसी वजह से हाल के दिनों में मानसून थोड़ा कमजोर पड़ने के बावजूद किसानों ने बुवाई जारी रखी। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश फिर तेज होगी, जिससे बुवाई को और गति मिल सकती है।
तिलहन और दलहन की बुवाई अब भी पीछे
जहां धान की बुवाई अच्छी स्थिति में है, वहीं दलहन और तिलहन की खेती अभी भी पिछले साल से पीछे चल रही है।
- दलहन का रकबा पिछले साल के मुकाबले15.1 प्रतिशत कम है।
- तिलहन की बुवाई5.6 प्रतिशत कम है।
- मोटे अनाज का रकबा11.2 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
- कपास की बुवाई भी पिछले साल से6 प्रतिशत कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो इन फसलों की बुवाई में भी सुधार हो सकता है।
लंबे सूखे की स्थिति बनी तो बढ़ सकती है परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआती बुवाई के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं हुई, तो खासकर कम सिंचाई वाले इलाकों में फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल से थोड़ा कम है, लेकिन 10 वर्षों के औसत से अधिक है। इससे आने वाले समय में सिंचाई के लिए कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।





