देश में कपास उत्पादन लगातार घट रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह किसानों का कपास की जगह अधिक मुनाफा देने वाली दूसरी फसलों की खेती की ओर रुख करना है। हालांकि सरकार का कहना है कि कपास की प्रति हेक्टेयर पैदावार में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है।
कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि 2020-21 में देश में 352.48 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में घटकर 290.91 लाख गांठ (अनंतिम) रह गया है। यानी पांच साल में कपास उत्पादन में 17 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार के मुताबिक, उत्पादन घटने की मुख्य वजह कपास के रकबे में कमी है, क्योंकि कई किसानों ने दूसरी लाभकारी फसलों की खेती शुरू कर दी है।
हालांकि, इस दौरान कपास की उत्पादकता 428 से 451 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच बनी रही। यानी उत्पादन घटने का कारण पैदावार में कमी नहीं, बल्कि कपास की खेती का कम होना है।
घरेलू और वैश्विक बाजार में बढ़ीं कीमतें
सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि घरेलू बाजार में S-6 किस्म के कपास के दाम करीब 18 फीसदी बढ़े हैं। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए जरूरत पड़ने पर कच्चे कपास और सूती धागे का आयात भी किया जाता है।
सरकार का कहना है कि उत्पादन, कैरी-ओवर स्टॉक और आयात को मिलाकर देश में कपास की उपलब्धता घरेलू कपड़ा उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
31 अक्टूबर तक आयात शुल्क में छूट
कपड़ा उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर लगने वाली 11 फीसदी आयात शुल्क में छूट दी है। इसके अलावा एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास पर आयात शुल्क में छूट पहले की तरह जारी रहेगी, जो 20 फरवरी 2024 से लागू है।
5,659 करोड़ रुपये का कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन
कपास उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ने 5,659.22 करोड़ रुपये के बजट के साथ कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन (2026-27 से 2030-31) को मंजूरी दी है। यह मिशन '5F' विजन—फार्म, फाइबर, फैक्टरी, फैशन और फॉरेन—पर आधारित है।
इस मिशन का लक्ष्य 2031 तक कपास उत्पादन को 297 लाख गांठ से बढ़ाकर 498 लाख गांठ करना है। यह कार्यक्रम 14 राज्यों के 140 जिलों में लागू होगा और इससे करीब 32 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
नई तकनीक से बढ़ेगी पैदावार
सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के तहत कपास पर विशेष परियोजना भी शुरू की है। वर्ष 2023-24 से देश के 8 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) और क्लोजर स्पेसिंग प्लांटिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, फील्ड ट्रायल में HDPS तकनीक से करीब 40 फीसदी और क्लोजर स्पेसिंग तकनीक से 32 फीसदी से अधिक पैदावार बढ़ने के नतीजे सामने आए हैं।सरकार ने कपास की MSP खरीद को आसान बनाने के लिए एक मोबाइल ऐप भी शुरू किया है।
कपास की खेती कैसे करें… वीडियो देखिए..





