हिमाचल प्रदेश की पहचान सिर्फ खूबसूरत पहाड़ों से नहीं, बल्कि सेब के बागानों से भी है। जम्मू-कश्मीर के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है और भारत के कुल सेब उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 20-25% है। हर साल शुरू होने वाला सेब सीजन लाखों बागवानों की आय और राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है।
इसी को देखते हुए इस बार सेब सीजन शुरू होने से पहले हिमाचल सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। सरकार ने छोटे सेब उत्पादकों और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित बागवानों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
सेब खरीद के लिए लॉन्च हुआ मोबाइल ऐप
हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि सेब सीजन की तैयारियों को लेकर कई दौर की बैठकें की जा चुकी हैं। बागवानों की सुविधा के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस ऐप पर अपना पंजीकरण जरूर कराएं। इसके जरिए बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत सेब खरीद से जुड़ी जानकारी और अन्य जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।
DBT के जरिए 14 करोड़ रुपये की मदद
सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना के तहत किसानों और बागवानों को कृषि और बागवानी से जुड़े इनपुट खरीदने के लिए अब तक करीब 14 करोड़ रुपये की सहायता दी है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को समय पर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
30 बोरियों की खरीद सीमा की अफवाह गलत
बागवानी मंत्री ने साफ किया कि सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है कि एक किसान से सिर्फ 30 बोरियां सेब ही खरीदी जाएंगी। उन्होंने किसानों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
यूनिवर्सल कार्टन में गड़बड़ी पर होगी कार्रवाई
मंत्री ने बताया कि कुछ जगहों से शिकायत मिली है कि यूनिवर्सल कार्टन का वजन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त टेप का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि कोई इस तरह की गड़बड़ी करते पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बारिश के बावजूद सड़कों को जल्द खोलने की कोशिश
मॉनसून के कारण राज्य में फिलहाल 47 सड़कें बंद हैं। सरकार का कहना है कि संबंधित विभाग इन्हें जल्द से जल्द खोलने में जुटे हैं, ताकि सेब की ढुलाई और किसानों की आवाजाही प्रभावित न हो।
सरकार का कहना है कि इस बार उसका पूरा प्रयास है कि सेब सीजन के दौरान किसानों को बेहतर खरीद व्यवस्था, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिलें, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच सकें और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद आर्थिक नुकसान से बच सकें।





