जून 2026 में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई और खरीफ फसलों की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले कम रही। इसके बावजूद किसानों ने खाद की खरीद लगभग सामान्य स्तर पर जारी रखी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूरिया और डीएपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की बिक्री में केवल मामूली गिरावट दर्ज की गई।
यूरिया और डीएपी की बिक्री में ज्यादा असर नहीं
जून 2026 में देशभर में करीब 33.3 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई, जो पिछले साल की तुलना में 2.63 प्रतिशत कम है। वहीं डीएपी (DAP) की बिक्री 8.1 लाख टन रही, जो 1.22 प्रतिशत कम है। हालांकि म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) की बिक्री में लगभग 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
किसानों को थी अच्छे मानसून की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जून में बारिश भले ही कम रही, लेकिन किसानों को उम्मीद थी कि जुलाई और अगस्त में मानसून बेहतर रहेगा। इसी भरोसे के चलते उन्होंने खरीफ फसलों की तैयारी जारी रखी और खाद की खरीद में बड़ी कमी नहीं आई।
खाद की कोई कमी नहीं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में जून के दौरान उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध था। इसलिए किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि मई के मुकाबले जून में वैश्विक बाजार में यूरिया और डीएपी की कीमतों में कुछ राहत मिली है, लेकिन पिछले साल की तुलना में ये अब भी महंगी हैं। जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत करीब 45 प्रतिशत और डीएपी की कीमत करीब 21 प्रतिशत अधिक रही।
सरकार पर बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ
खाद की ऊंची वैश्विक कीमतों का असर सरकार के सब्सिडी खर्च पर पड़ सकता है। सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया था। लेकिन ICRIER की रिपोर्ट के मुताबिक परिस्थितियों के आधार पर यह खर्च 2.42 लाख करोड़ रुपये से 3.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
इस समय किसानों के लिए अच्छी बात यह है कि खाद की उपलब्धता बनी हुई है। हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सरकार का सब्सिडी खर्च बढ़ सकता है। इसका असर भविष्य में उर्वरक नीति और सरकारी बजट पर पड़ सकता है।





