असम में बाढ़ का कहर अभी पूरी तरह थमा नहीं है। हालांकि पिछले 24 घंटे में बारिश कम होने से हालात में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन लाखों लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। सैकड़ों गांव पानी में डूबे हैं और हजारों हेक्टेयर खेती बर्बाद हो चुकी है। बाढ़ की वजह से लोगों का जनजीवन प्रभावित है और किसानों के सामने भी बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के मुताबिक, राज्य के 6 जिलों के 6.54 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा असर शिवसागर, चराइदेव, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट और नगांव जिलों में देखा गया है। इनमें शिवसागर में करीब 2.90 लाख, चराइदेव में 1.90 लाख और जोरहाट में 1.30 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गांवों पर पड़ा है। राज्य के 810 गांव अब भी पानी में डूबे हुए हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में 274 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र बनाए हैं, जहां 18,902 विस्थापित लोगों को ठहराया गया है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
बाढ़ का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हुआ है। ASDMA के अनुसार, 34,970.8 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूब गई है। धान समेत कई खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खेतों से जल्द पानी नहीं निकला, तो किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इससे उनकी लागत बढ़ेगी और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक जलभराव रहने से मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बारिश रुकने से हालात में सुधार हो रहा है और प्रशासन लगभग सभी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की एक टीम भी राज्य पहुंच गई है।
हालांकि, राज्य की कुछ नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
असम में हर साल क्यों आता है बाढ़, ग्राउंड रिपोर्ट देखिए-





