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सरकार अगले पांच वर्षों में देश भर में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां बनाएगी

डेयरी क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। पशुधन उप-क्षेत्र से उत्पादन के मूल्य में दूध और दूध उत्पादों का बड़ा हिस्सा होता है। दूध उत्पादन का मूल्य 2022-23 में खाद्यान्न

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Pooja Rai· Correspondent

13 मार्च 2025· 2 min read

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सरकार अगले पांच वर्षों में देश भर में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां बनाएगी

सरकार अगले पांच वर्षों में देश भर में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां बनाएगी

डेयरी क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। पशुधन उप-क्षेत्र से उत्पादन के मूल्य में दूध और दूध उत्पादों का बड़ा हिस्सा होता है। दूध उत्पादन का मूल्य 2022-23 में खाद्यान्न उत्पादन के कुल मूल्य को पार करते हुए 11.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह जानकारी केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने 12 मार्च, 2025 को राज्यसभा में दी है।

मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि एनपीडीडी के तहत 23,516 डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना/सुदृढ़ीकरण किया गया है। इसके अलावा DAHD और सहकारिता मंत्रालय संयुक्त रूप से सहकारी डेयरी मॉडल के विस्तार के लिए श्वेत क्रांति 2.0 को लागू कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य NPDD योजना के माध्यम से पांच वर्षों में देश भर में 75000 नई डेयरी सहकारी समितियां बनाना है।

सब्सिडी शुरू करने की कोई योजना नहीं
डेयरी क्षेत्र से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के पास डेयरी किसानों के लिए मूल्य समर्थन योजना या सब्सिडी शुरू करने की कोई योजना नहीं है क्योंकि DAHD देश में दूध की खरीद और बिक्री की कीमतों को विनियमित नहीं करता है। कीमतें सहकारी और निजी डेयरियों द्वारा उनके उत्पादन की लागत और बाजार के आधार पर तय की जाती हैं। डेयरी सहकारी क्षेत्र में उपभोक्ता के लगभग 70 से 80 प्रतिशत रुपये का भुगतान दूध उत्पादक किसानों को किया जाता है।

ये भी पढ़ें - MP Budget 2025-26: किसानों को क्या मिला?

डेयरी से जुड़ी योजनाएँ
आगे उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन और दूध प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे के लिए किए गए प्रयासों को पूरक और संपूरित करने के लिए, DAHD देश भर में निम्नलिखित योजनाओं को लागू कर रहा है, जैसे

1.राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)
2.डेयरी गतिविधियों में संलग्न डेयरी सहकारी समितियों एवं किसान उत्पादक संगठनों को सहायता प्रदान करना (एसडीसीएफपीओ)
3.पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ)
4.राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम)
5.राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम)
6.पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी)

उन्होंने बताया कि ये योजनाएं दूध देने वाले पशुओं की दूध उत्पादकता में सुधार, डेयरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, चारा और चारे की उपलब्धता बढ़ाने और पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में मदद कर रही हैं। ये हस्तक्षेप दूध उत्पादन की लागत को कम करने, संगठित बाजार उपलब्ध कराने और उपज के लाभकारी मूल्य के साथ डेयरी फार्मिंग से आय बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

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