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राजस्थान में प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा, वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने पर सरकार दे रही है 50 हजार रुपये की सब्सिडी

खेतों में लगातार केमिकल फर्टिलाइजर के प्रयोग से उत्पादन की क्वालिटी पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है इसके साथ ही मिट्टी की सेहत भी खराब हो रही है, जिसकी वजह से उत्पादन में कमी आ रही है। इसी को देखते हुए र

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Pooja Rai· Correspondent

10 सितंबर 2024· 3 min read

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राजस्थान में प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा, वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने पर सरकार दे रही है 50 हजार रुपये की सब्सिडी

राजस्थान में प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा, वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने पर सरकार दे रही है 50 हजार रुपये की सब्सिडी

खेतों में लगातार केमिकल फर्टिलाइजर के प्रयोग से उत्पादन की क्वालिटी पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है इसके साथ ही मिट्टी की सेहत भी खराब हो रही है, जिसकी वजह से उत्पादन में कमी आ रही है। इसी को देखते हुए राजस्थान सरकार ने राज्य में केमिकल फर्टिलाइजर मुक्त खेती करने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 5 हजार वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी भी दे रही है।

वर्तमान समय में खेती में रासायनिक खादों का बिना सोचे समझे प्रयोग बढ़ता जा रहा है, जिससे मिट्टी की उपज क्षमता में लगातार गिरावट आ रही है। इसे देखते हुए सरकार भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है, जिसके लिये केन्द्र और राज्य सरकारें तरह तरह की योजनाएँ ला रही हैं, जिससे किसानों को प्रोत्साहन और आर्थिक मदद मिले और वो इसमें रुचि लें। इसी क्रम में राजस्थान सरकार ने राज्य में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने के लिए सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में कुल 5 हजार वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई जाएगी, जिसके लिए किसानों को सब्सिडी मिलेगी।

क्या है वर्मी कम्पोस्ट?
वर्मी-कम्‍पोस्‍ट को वर्मीकल्‍चर या केंचुआ पालन भी कहते हैं। केंचुओं के मल से तैयार खाद ही वर्मी कम्‍पोस्‍ट कहलाती है। यह सब प्रकार की फसलों के लिए प्राकृतिक, सम्‍पूर्ण और संतुलित आहार है।
केंचुओं के द्वारा आर्गेनिक मटेरियल खाने के बाद उसके पाचन-तंत्र से गुजरने के बाद जो वेस्ट मटेरियल मल के रूप में बाहर निकलता है उसे वर्मी कम्पोस्ट या केंचुआ खाद कहते हैं। यह हल्का काला, दानेदार या देखने में चायपत्ती के जैसा होता है यह फसलों के लिए काफी लाभकारी होता है। इस खाद में मुख्य पोषक तत्व के अतिरिक्त दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंस और कुछ हारमोंस एवं एंजाइमस भी पाए जाते हैं जो पौधों की वृद्धि के लिए लाभदायक होते हैं।

कितनी मिलेगी सब्सिडी?
योजना के अनुसार स्थायी वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, स्थाई वर्मी कंपोस्ट इकाई पर सब्सिडी लेने के लिए किसान के पास एक जगह पर न्यूनतम खेती योग्य 0.4 हेक्टेयर भूमि होनी चाहिए। साथ ही वर्मी कंपोस्ट उत्पादन के लिए 30 फीट x 8 फीट x 2.5 फीट आकार के पक्के निर्माण के साथ वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापना के लिए लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 50 हजार रुपये प्रति इकाई के अनुसार किसानों को सब्सिडी दी जाएगी।

इनको मिलेगी सब्सिडी
पक्के शेड की ऊंचाई बीच में कम से कम 10 फीट और किनारे से 8 फीट होनी चाहिए. एक इकाई के लिए कम से कम 60 किलोग्राम केंचुए, रजिस्टर्ड गैर सरकारी संस्थान, गौशाला, कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि कॉलेज आदि से किसान खरीद सकते है। प्रत्येक बेड में 400-400 ग्राम ट्राइकोडर्मा और एक किलो नीम की खली उपयोग करना होगा।

कैसे और कहां करें आवेदन
इच्छुक किसान जो जैविक खेती के लिए वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाना चाहते हैं, वे किसान नजदीकी ई-मित्र केन्द्र पर जाकर या खुद राजस्थान किसान पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने पर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किसान को सब्सिडी दी जाएगी, साथ ही लक्ष्य से अधिक आवेदन होने की स्थिति में लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए किसानों के पास न्यूनतम 6 महीने पुरानी जमाबंदी होना ज़रूरी है।

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