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रसायनिक खादों के उपयोग को कम करने के लिए प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा: कृषि मंत्री

'आज रसायनिक खाद, केमिकल के कारण केवल इंसान का ही स्वास्थ्य खराब नहीं हो रहा है, बल्कि धरती का भी स्वास्थ्य खराब हो रहा है. जरूरत हो या ना हो, हम जमीन में रसायनों का धड़ल्ले से इस्‍तेमाल कर रहें हैं और

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Pooja Rai· Correspondent

8 अप्रैल 2025· 4 min read

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रसायनिक खादों के उपयोग को कम करने के लिए प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा: कृषि मंत्री

रसायनिक खादों के उपयोग को कम करने के लिए प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा: कृषि मंत्री

'आज रसायनिक खाद, केमिकल के कारण केवल इंसान का ही स्वास्थ्य खराब नहीं हो रहा है, बल्कि धरती का भी स्वास्थ्य खराब हो रहा है. जरूरत हो या ना हो, हम जमीन में रसायनों का धड़ल्ले से इस्‍तेमाल कर रहें हैं और उन्हीं उत्पादों को खाने से इंसान का भी स्वास्थ्य खराब हो रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया गया है.' नंदूरबार में बोले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि मंत्री ने कहा कि अगर किसी किसान के पास 5 एकड़ जमीन है तो पूरी जमीन पर नहीं, लेकिन कुछ हिस्से पर प्राकृतिक खेती जरूर करें. इसके लिए केन्द्र सरकार आवश्यक सहायता भी दे रही है. उन्होंने कहा कि हम नंदुरबार जिले में कुछ गांव तय कर लें और वहां रसायनिक खाद और कीटनाशक रहित खेती करें. शिवराज सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र भी प्रशिक्षण देगा और आवश्यक व्यवस्था करेगा.

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को महाराष्ट्र में नंदूरबार के एक दिवसीय दौरे यहां स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में डॉ. हेडगेवार सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और लोगों को संबोधित किया. साथ ही, किसान ज्ञान संवर्धन केंद्र- कृषक मंडपम् और महिला प्रौद्योगिकी पार्क का उद्घाटन किया. इस दौरान शिवराज सिंह ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि आज नंदूरबार के कृषि विज्ञान केन्द्र में आने का अवसर मिला, ये केन्द्र डॉक्टर हेडगेवार सेवा समिति चलाती है. हेडगेवार जी के चरणों में प्रणाम करता हूं.

कृषि मंत्री ने कहा कि हेडगेवार जी हमारे मार्गदर्शक, प्रेरणापुंज हैं, जिनकी प्रेरणा से भारत माता की सेवा के लिए लाखों-लाख लोग निकल पड़े. शिवराज सिंह ने कहा कि हमारा देश अद्भुत है, 5 हजार साल से ज्यादा तो हमारा ज्ञात इतिहास है. वहीं, नंदूरबार जिले को लेकर शिवराज सिंह ने कहा कि आज संकल्प लें कि हम अपने जिले के हर एक गांव को गरीबीमुक्त बनाएंगे.

ये भी पढ़ें - करीब 1.15 करोड़ हेक्टेयर घासभूमि और 10 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि के बावजूद देश में अनुमानित 11% हरित चारे की कमी

किसान और उपभोक्ता के बीच की कीमत का अंतर कम
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार किसान हित में फैसले लिए जा रहे हैं. अभी सरकार ने एक योजना बनाई है, जिसके अंतर्गत किसान और उपभोक्ता के बीच की कीमत का अंतर कम करना है. अभी कुछ फसलों के दाम गिर गए थे तो हमने तय किया कि अगर किसान बड़े शहरों में ले जाकर अपने उत्पाद को बेचना चाहता है तो सरकारी एजेंसी के माध्यम से उत्पाद को दूसरे शहरों तक पहुंचाया जाएगा और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च केन्द्र सरकार उठाएगी.

गरीबीमुक्त गांव बनाना संकल्‍प
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीबीमुक्त गांव बनाना हमारा संकल्प है. गरीबीमुक्त गांव का मतलब है कि गांव में हर किसी के पास आजीविका का साधन हो. हर हाथ में काम हो और उनकी आय बढ़े. गरीबीमुक्त गांव के लिए हर बहन आजीविका मिशन से जुड़कर कार्य करें, स्वयं-सहायता समूह से जुड़ें, छोटे-छोटे उद्योग लगाएं और आत्मनिर्भर बनें. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अब तक 1 करोड़ 48 लाख से ज्यादा लखपति दीदी बन चुकी है.

जल संरक्षण पर हो काम
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नंदूरबार जिले में जल संरक्षण के लिए कुछ काम किए जा सकते हैं. एक तो जो उपलब्ध जल है उसका बेहतर प्रयोग करें. यहां जगह-जगह पानी रोकने की कोशिश हुई है, लेकिन वो पानी खेतों में नहीं पहुंच रहा है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ उठाकर ड्रिप एंड स्प्रिंकलर के माध्यम से कम पानी को भी खेतों में पहुंचाया जा सकता है.

शिवराज सिंह ने अधिकारियों से कहा कि आप प्रोजेक्ट बनाइए, कृषि विकास योजना के अंतर्गत भारत सरकार भी सहायता करेगी. पूरा जिला नहीं तो कुछ इलाका चिन्हित कर लीजिए. इसके लिए भी भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर काम करेगी. दूसरा काम ये है कि पानी जमीन में कैसे रुके, इसके लिए प्रधानमंत्री ने कहा है कि कैच द रैन, यानी वर्षा के पानी को पकड़ो, उसे बहकर मत जाने दो, वो जमीन में कैसे जाए, इसके भी हम प्रयास करेंगे.
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