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महाराष्ट्र: संयुक्त किसान मोर्चा की 17 मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी

महाराष्ट्र में किसानों बढ़ रही आत्महत्याओं के बीच संयुक्त किसान मोर्चा विदर्भ पहुंचा। किसान मोर्चा के इस दौरे का मकसद केंद्र तक इस मुद्दे को पहुंचाना है। इस यात्रा की शुरुआत महात्मा गांधी के सेवाग्राम

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Jalish· Correspondent

19 सितंबर 2025· 5 min read

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महाराष्ट्र:  संयुक्त किसान मोर्चा की 17 मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी

महाराष्ट्र: संयुक्त किसान मोर्चा की 17 मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी

महाराष्ट्र में किसानों बढ़ रही आत्महत्याओं के बीच संयुक्त किसान मोर्चा विदर्भ पहुंचा। किसान मोर्चा के इस दौरे का मकसद केंद्र तक इस मुद्दे को पहुंचाना है। इस यात्रा की शुरुआत महात्मा गांधी के सेवाग्राम से शुरू हुई। किसान ने नेता राकेश टिकैत की अगुवाई में पंजाब, हरियाणा, झारखंड, केरल, तेलंगाना और महाराष्ट्र के 23 राष्ट्रीय नेताओं का ये दौरा तीन दिनों तक चलेगा।

किसान नेताओं ने नागापुर गांव में किसान आत्महत्या प्रभावित परिवार से मुलाकात की। वर्धा में इस दौरे की पहली सभा सत्यनारायण वाचनालय सभागार में आयोजित की गई। सभा को राजेश टिकैत, डॉ. अशोक ढवळे, विजय जावंधिया, विजू कृष्णन, डॉ. अजित नवले, राजन क्षीरसागर, परमीत सिंह मेहमा, किशोर ढमाले समेत दूसरे नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान नेताओं ने किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी, फसलों को उचित दाम, भूमि अधिग्रहण का विरोध, और किसान हितैशी फसल बीमा का मुद्दा उठाया। साथ ही एकजुट होकर कर राज्य में सामूहिक नेतृत्व के साथ आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि, राज्य में शुरू हो रहे किसान आंदोलन को पूरी ताकत से समर्थन दिया जाएगा। वहीं डॉ. अशोक ढवळे ने कहा कि, मोदी सरकार ने कपड़ा आयात कर हटाकर पहले से संकटग्रस्त किसानों को बर्बाद करने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि, राज्य में "देवा भाई" और केंद्र में "मोदी भाई" की सरकार किसानों को तबाही की ओर ले जा रही है।

किसान नेताओं की मांग

सत्ता में आने से पहले चुनाव प्रचार में किए गए वादे के अनुसार किसानों का संपूर्ण कर्ज बिना किसी शर्त के तुरंत माफ किया जाए। नियमित कर्ज भरने वाले किसानों सहित सभी किसानों का 7/12 कोरा किया जाए। फसल कर्ज के साथ ही मध्यम अवधि, पॉली हाउस, शेड नेट, भूमि सुधार, सिंचाई सुविधा सहित सभी कर्जों को कर्जमाफी में शामिल किया जाए।

2. किसान दोबारा कर्ज़दार न हो, इसके लिए कृषि उपज को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वास्तविक उत्पादन लागत पर आधारित डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए। इसके लिए कृषि लागत कम की जाए, सरकारी खरीद की पूरी गारंटी दी जाए, आयात-निर्यात और सरकारी हस्तक्षेप की नीतियां किसान हित में रहें इसकी गारंटी दी जाए। इसके लिए कृषि उपज समर्थन मूल्य कानून बनाया जाए। कृषि निर्यात पर लगी रोक हटाई जाए और किसानों को खुले व्यापार व तकनीकी स्वतंत्रता दी जाए।

3. खेत मज़दूरों और महिलाओं के माइक्रो फाइनेंस, बचत समूह व साहूकारी कर्ज़ माफ किए जाएं।

4. कृषि लागत कम करने के लिए बुवाई से कटाई तक के सभी कृषि कार्यों को रोजगार गारंटी योजना में शामिल किया जाए। डेयरी व्यवसाय, पोल्ट्री उद्योग सहित सभी कृषि आधारित उद्योगों को भी इसमें शामिल किया जाए। इसके लिए स्वतंत्र और पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किया जाए। फल फसल रोजगार गारंटी योजना के लिए 3/5 का अनुपात नीति लागू की जाए।

5. प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को पर्याप्त मुआवजा मिले, इसके लिए किसान हितैषी फसल बीमा योजना लागू की जाए। एक रुपये में फसल बीमा उपलब्ध हो और रद्द किए गए सभी ट्रिगर आधारित सुरक्षा कवच बहाल किए जाएं।

6. शक्ति पीठ महामार्ग, वाधवन पोर्ट, सुरजागड सहित राज्य में चल रहे जबरन भूमि अधिग्रहण बंद किए जाएं।

7. दूध को उत्पादन लागत पर आधारित उचित मूल्य दिया जाए। गाय के दूध का न्यूनतम मूल्य 50 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 65 रुपये प्रति लीटर तय किया जाए। दूध क्षेत्र में एफआरपी और रेवेन्यू शेयरिंग नीति लागू की जाए। दूध मिलावट रोकने के लिए ठोस नीति बनाई जाए।

8. प्याज को न्यूनतम 40 रुपये प्रति किलो मूल्य दिया जाए। प्याज पर निर्यात प्रतिबंध, न्यूनतम निर्यात मूल्य और निर्यात कर स्थायी रूप से बंद किए जाएं। कीमत गिराने के लिए हो रहा नाफेड और एनसीसीएफ का दुरुपयोग बंद कर इन संस्थाओं का उपयोग किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए किया जाए।

9. गन्ने के लिए वर्ष 2025-26 में 9% रिकवरी पर प्रति टन 4300 रुपये और प्रत्येक 1% अतिरिक्त रिकवरी पर 430 रुपये एफआरपी दी जाए। अब तक की बकाया एफआरपी राशि किसानों को दी जाए।

10. खाद, बीज और कृषि निवेश की गुणवत्ता जांच के लिए हर तहसील स्तर पर सरकारी और विश्वसनीय प्रयोगशालाओं की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

11. खेती योग्य वन भूमि, देवस्थान इनाम भूमि, चारागाह भूमि, वरकस भूमि आदि पर खेती करने वालों और घरों के लिए नींव भूमि को श्रमिकों के नाम किया जाए।

12. बाजार समितियों में हो रही किसानों की लूट बंद करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।

13. निर्माण मजदूर मंडल की तर्ज पर किसान-कामगार कल्याणकारी मंडल की स्थापना की जाए और उसके अंतर्गत किसानों व खेत मज़दूरों को परिवार सहित जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, बच्चों को छात्रवृत्ति, औज़ार खरीदने के लिए अनुदान, पेंशन, घरकुल जैसी योजनाएं लागू की जाएं।

14. दिव्यांग और विधवाओं को न्यूनतम 6000 रुपये प्रति माह मानधन दिया जाए।

15. रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत मज़दूरी की दर न्यूनतम 700 रुपये की जाए और वर्ष में कम से कम 200 दिन काम दिया जाए।

16. चरवाहों और मछुआरों के लिए स्वतंत्र नीति बनाई जाए।

17. दिनांक 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के इतिवृत्त के अनुसार शासनादेश जारी किया जाए।

न्यूज़ पोटली के लिए महाराष्ट्र से सिद्धनाथ माने की रिपोर्ट

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