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मखाना को मिलेगा मिशन मोड सपोर्ट: 6 साल में 476 करोड़ से बदलेगा भारत का मखाना सेक्टर

अब मखाना सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिसर्च, टेक्नोलॉजी, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट का नया चेहरा बनेगा। केंद्र सरकार ने मखाना सेक्टर को संगठित और आधुनिक बनाने के लिए 2025-26 से 2030-31

Arvind Shukla

Arvind Shukla·Founder & Editor-in-Chief·15 Dec 2025· 3 min read

मखाना को मिलेगा मिशन मोड सपोर्ट: 6 साल में 476 करोड़ से बदलेगा भारत का मखाना सेक्टर

मखाना को मिलेगा मिशन मोड सपोर्ट: 6 साल में 476 करोड़ से बदलेगा भारत का मखाना सेक्टर

अब मखाना सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिसर्च, टेक्नोलॉजी, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट का नया चेहरा बनेगा। केंद्र सरकार ने मखाना सेक्टर को संगठित और आधुनिक बनाने के लिए 2025-26 से 2030-31 तक छह साल का मल्टी-ईयर डेवलपमेंट प्रोग्राम मंज़ूर किया है, जिस पर 476.03 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस स्कीम का मकसद खेत से लेकर ग्लोबल मार्केट तक मखाना की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।

भारत के मखाना सेक्टर को बढ़ावा देने के ल‍िए केंद्र सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक छह साल के समय के लिए 476.03 करोड़ रुपए के खर्च वाले एक मल्टी-ईयर डेवलपमेंट प्रोग्राम को मंज़ूरी दी है। शुक्रवार को शुरू हुई इस स्कीम का मकसद इकोसिस्टम को मॉडर्न बनाना और बढ़ाना है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने एक ऑफिशियल रिलीज में कहा कि इस प्रोग्राम को रिसर्च और इनोवेशन, अच्छी क्वालिटी के बीजों का प्रोडक्शन, किसानों की कैपेसिटी बिल्डिंग, बेहतर कटाई और कटाई के बाद के मैनेजमेंट, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग, एक्सपोर्ट प्रमोशन और क्वालिटी एश्योरेंस पर फोकस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे लागू करने का प्रोसेस नई दिल्ली के कृषि भवन में हुई नेशनल मखाना बोर्ड की पहली मीटिंग के साथ फॉर्मली शुरू हुआ। मीटिंग की अध्यक्षता कृषि और किसान कल्याण विभाग के सेक्रेटरी देवेश चतुर्वेदी ने की और इसमें बोर्ड और सेंट्रल सेक्टर स्कीम दोनों को ऑपरेशनल बनाने पर फोकस किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, बोर्ड ने राज्यों और रिसर्च इंस्टीट्यूशन द्वारा जमा किए गए सालाना एक्शन प्लान का रिव्यू किया और प्रोग्राम के अलग-अलग हिस्सों के लिए बजट एलोकेशन को मंजूरी दी।

इन कदमों का उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास का समर्थन करना है। बैठक में बीज की आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता पर भी बात हुई और कहा गया कि राज्यों से बीज की आवश्यकताओं को समेकित किया जाना चाहिए और चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए बिहार में एसएयू सबौर और सीएयू समस्तीपुर के माध्यम से पूरा किया जाना चाहिए। कौशल और ज्ञान हस्तांतरण को मजबूत करने के लिए, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार और एनआरसी मखाना, दरभंगा, विभिन्न राज्यों के प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे। पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मखाना मूल्य श्रृंखला में नवीनतम तकनीकी विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें- यूपी के इन 17 जिलों में खुलेंगे 50 उड़द खरीद केंद्र, जानिए कितनी है MSP?

बोर्ड ने नई खेती और प्रसंस्करण तकनीकों को विकसित करने, ग्रेडिंग, सुखाने, पॉपिंग और पैकेजिंग के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण, आधुनिक कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने और मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार संबंधों और निर्यात की तैयारी को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया। नेशनल मखाना बोर्ड को यूनियन बजट 2025-26 में की गई घोषणा के हिसाब से बनाया गया था और इसे इस साल 15 सितंबर को बिहार में PM मोदी ने ऑफिशियली लॉन्च किया था, जो मखाना इंडस्ट्री को मजबूत और मॉडर्न बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम दिखाता है।

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