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बिल गेट्स और भारत की खेती

फाउण्डेशन ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (CGIAR) के साथ हाथ मिलाया जिससे कि वो भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में काम कर रहे वैज्ञानिकों और उनके किए गए

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Ashish· Correspondent

2 मार्च 2023· 2 min read

बिल गेट्स और भारत की खेती

बिल गेट्स और भारत की खेती

माइक्रोसॉफ्ट के सहसंस्थापक बिल गेट्स भारत के दौरे पर हैं, यह महामारी के बाद उनका पहला दौरा है।

दिल्लीः बिल गेट्स जो एक कल्याणकारी संस्था, बिल एण्ड मेलिण्डा गेट्स फाउण्डेशन चलाते हैं और विकासशील देशों में इसी संस्था के माध्यम से अपना योगदान करते आ रहे हैं। बिल गेट्स ने अपने ब्लॉग में बताया कि वैसे तो वो कई बार भारत गए हैं पर कोरोना महामारी के बाद पहली बार भारत दौरे पर जा रहे हैं।

गेट्स फाउण्डेशन ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (CGIAR) के साथ हाथ मिलाया जिससे कि वो भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में काम कर रहे वैज्ञानिकों और उनके किए गए कामों में अपना योगदान दे सकें।

भारत के IARI (भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान) के दौरे में गेट्स ने वहाँ के वैज्ञानिकों से बातचीत की और ट्वीटर पर वैज्ञानिकों के साथ की फोटो साझा करते हुए ट्वीट में कहते हैं “भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आकर और भारत में जो मौसम अनुकुल फसल तैयार करने की तकनीकी लायी जा रही है उन्हे जानकर, मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं व्याकुल हूँ भारत को तकनीकी के मार्ग पर और अधिक काम करते हुए देखने के लिए और ये दुनिया के किसानों के लिए भी लाभकारी हो सकेगा।”

देविंदर शर्मा का इंटरव्यू

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ए के सिंह ने फोटो ट्वीट करके बताया “बिल गेट्स ने मौसम अनुकूल फसल और पोषक तत्वों से भरपूर गुणवत्ता वाले बीजों की सराहना की है।” संस्थान के दौरे के दोरान डॉ. ए के सिंह ने बिल गेट्स को संस्थान में चल रहे शोधो और वैज्ञानिकों के उन्नत कामों से अवगत कराया। डॉ. सिंह कहना है कि संस्थान का पूरा जोर जलवायू परिवर्तन के प्रति सहनशील फसल के बीज पर है।

डॉ. ए के सिहं की ट्वीटेड फोटो

बिल गेट्स भारत की कृषि क्षेत्र में अनेक सुधार देखेते हैं। बदलते मौसम के चलते भारत के कृषि वैज्ञानिक ऐसे बीज लेके आएंगे जो जलवायु अनुकूल उन्नत बीज होंगे और ये बीज हर परिस्थिति में खड़े उतरेगें। ये सिर्फ भारत के किसनों के लिए नहीं होगा बल्कि पूरी दुनिया के किसान इससे फायदा पा सकेगें।

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