Skip to content
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. दाल की खेती के कितने फायदे?
एग्री बुलेटिन

दाल की खेती के कितने फायदे?

आप जानकर हैरान होंगे कि वित्त वर्ष 2024 में भारत का दाल आयात 84% बढ़कर छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।आपको बता दें कि भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25%), उपभोक्ता (

NP

Pooja Rai· Correspondent

19 जून 2025· 4 min read

agriculture newskheti kisaniNews Potli
दाल की खेती के कितने फायदे?

दाल की खेती के कितने फायदे?

आप जानकर हैरान होंगे कि वित्त वर्ष 2024 में भारत का दाल आयात 84% बढ़कर छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।आपको बता दें कि भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25%), उपभोक्ता (विश्व खपत का 27%), तथा आयातक (दालों का 14%) है।

दाल, जिसे हम सब रोज अपने भोजन में शामिल करते हैं। यह प्रोटीन का एक मुख्य स्रोत है, जो हम सबके लिए बहुत जरूरी है। हम इसका इतना इस्तेमाल करते हैं कि विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बाद भी भारत को दूसरे देशों से दाल आयात करना पड़ता है। आयात को कम करने के लिए सरकार क्या कर रही है? आख़िर ऐसा क्यों है कि किसान इसकी खेती में बहुत दिलचस्पी नहीं लेते? दाल की खेती सिर्फ उपभोग के लिए नहीं बल्कि कई दूसरे मायनों में भी आवश्यक है, जानिए क्यों ?

देश में खाद्यान्न के अंतर्गत आने वाले कुल क्षेत्रफल में दालों का योगदान लगभग 20% है तथा कुल खाद्यान्न उत्पादन में इनका योगदान मात्र लगभग 7%-10% है। इसकी खेती किसान इसलिए नहीं करते क्योंकि सरकार इस फसल को खरीदने की गारंटी नहीं देती, जो अब दी है। सरकार दाल उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अरहर, मसूर और उड़द की दाल को सौ प्रतिशत खरीदने का वायदा किया है, जो पहले नहीं था। एक वजह इसकी खेती को लेकर जागरूकता का ना होना भी हो सकता है। एक बार अच्छा उत्पादन न होने पर किसान दोबारा ट्राई नहीं करते या इसकी वजह नहीं पता करते बस दूसरी फसल को अपना लेते हैं, जो उन्हें आसान लगता है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक देश के शीर्ष पांच दाल उत्पादक राज्य हैं।

मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्व देती हैं दालें
यह हम सबको पता है कि स्वस्थ मिट्टी स्वस्थ और पौष्टिक खाद्य पदार्थ उगाने में योगदान देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दालें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे पोषक तत्व देकर मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती हैं?
दालों को 60 प्रतिशत से अधिक नाइट्रोजन हवा से मिलता है। यह नाइट्रोजन फिर मिट्टी में मिल जाता है और इन फलियों को आस-पास की फसलों के साथ इस नाइट्रोजन को साझा करता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।

ये भी पढ़ें - बीज और कीटनाशक कानून को सख्त बनाने की जरूरत क्यों है?

दालें जलवायु परिवर्तन को कम करने में करती हैं मदद
दाल सिर्फ़ हमारे शरीर के लिए ही नहीं बल्कि इसकी खेती मिट्टी के स्वास्थ के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
दालें मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों को लाने की अपनी क्षमता के कारण रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारक हैं। वे जड़ों के विकास को भी बढ़ाते हैं, कार्बन अवशोषण को बढ़ावा देते हैं और जलवायु परिवर्तन को कम करने में योगदान देते हैं।

मिट्टी की संरचना को बढ़ाती हैं दालें
मिट्टी की संरचना वह तरीका है जिसमें अलग-अलग रेत, गाद और मिट्टी के कण इकट्ठे होते हैं। अगर मिट्टी भुरभुरी और छिद्रपूर्ण है और जड़ें अच्छी तरह फैली हुई हैं, तो मिट्टी की संरचना अच्छी होती है। हालाँकि, अगर मिट्टी सघन है (जिसे अलग करना मुश्किल है), तो मिट्टी की संरचना खराब हो सकती है। दालों की खेती से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है।

मिट्टी की जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करती हैं दालें
मिट्टी हमारे ग्रह की 50 प्रतिशत जैव विविधता का घर है। आमतौर पर, स्वस्थ मिट्टी में केंचुए, नेमाटोड, 20-30 प्रजाति के घुन, 50-100 प्रजाति के कीड़े, सैकड़ों प्रजाति के कवक और हजारों प्रजाति के बैक्टीरिया और एक्टिनोमाइसेट्स होते हैं। यह मिट्टी की जैव विविधता है: विविध जीवित जीव एक दूसरे के साथ बातचीत करते हैं और पोषक चक्रण, मिट्टी कार्बन पृथक्करण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जैसी आवश्यक सेवाएं देते हैं।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— दाल की खेती के कितने फायदे?

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs