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जीवन में रोटी के बाद कपड़ा ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, मिशन कॉटन को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कोयम्बटूर में कपास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कपास उत्पादकता बढ़ाने के लिए इससे जुड़े हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किय

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Pooja Rai· Correspondent

12 जुलाई 2025· 4 min read

agriculture newsCoimbatorecotton mission
जीवन में रोटी के बाद कपड़ा ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, मिशन कॉटन को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: कृषि मंत्री

जीवन में रोटी के बाद कपड़ा ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, मिशन कॉटन को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कोयम्बटूर में कपास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कपास उत्पादकता बढ़ाने के लिए इससे जुड़े हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया। मंत्री चौहान ने कहा कि जीवन में रोटी के बाद कपड़ा ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए उच्च गुणवत्ता वाले कपास उत्पादन के लिए एकजुट होकर हम प्रयास करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि मिशन कॉटन को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जायेंगे।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में 11 जुलाई को तमिलनाडु, कोयम्बटूर के आईसीएआर- गन्ना प्रजनन संस्थान में कपास उत्पादकता बढ़ाने को लेकर अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में भारत में कपास का इतिहास, परिदृश्य, चुनौतियां, उत्पादकता बढ़ाने के लिए आगामी रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

इस बैठक से पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने खेतों में जाकर कपास उत्पादक किसानों से बातचीत की और हितधारकों से परामर्श करते हुए उनकी समस्याओं एवं चुनौतियों के बारे में भी जाना। इसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्री के संबोधन के साथ बैठक की शुरुआत हुई। चौहान ने कहा कि आज यह अहम बैठक तमिलनाडु की पवित्र धरा पर हो रही है। तमिलनाडु, भारत का अत्यंत प्राचीन और महान प्रदेश है। तमिल भाषा का 5,000 साल पुराना ज्ञान का इतिहास है। तमिलनाडु की इस धरती से आज कपास की क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। बैठक का विचार-मंथन मात्र औपचारिकता नहीं है।

रोटी के बाद सबसे बड़ी जरूरत कपड़ा
चौहान ने कहा कि जिंदगी में रोटी के बाद सबसे बड़ी जरूरत कपड़ा है। जैसे रोटी के बिना नहीं रहा जा सकता, वैसे ही कपड़े के बिना भी रहना असंभव है। कपड़ा बनता है कपास से और कपास पैदा करते हैं किसान। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा है। कपास उत्पादन में कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं। अन्य राष्ट्रों के मुकाबले देश में उत्पादन कम हो रहा है। कपास उत्पादन के लिए विकसित बीटी कॉटन किस्म में वायरस अटैक के कारण कई तरह की समस्या पैदा हो गई हैं। उत्पादन बढ़ने की बजाय घट रहा है। जिसके लिए हमें काम करना होगा।

ये भी पढ़ें - किसान आत्मनिर्भर भारत और “लोकल से ग्लोबल” विजन में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं: पीयूष गोयल

वायरस प्रतिरोधी उन्नत बीज बनाने होंगे
उन्होंने कहा कि दुनिया के बाकी देशों के समान भारत में भी कपास उत्पादन बढ़ाने को लेकर हरसंभव कदम उठाने होंगे। आधुनिकतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर लक्ष्यबद्ध होकर आगे बढ़ना होगा। वायरस प्रतिरोधी उन्नत बीज बनाने होंगे। निश्चित समय सीमा में किसानों तक इन उन्नत किस्म के बीज की पहुंच सुनिश्चित भी करनी होगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कई बार उन्नत किस्म के बीज तैयार कर लिए जाते हैं, लेकिन उचित समय पर किसानों तक नहीं पहुंच पाते। इस काम की पूर्ति के लिए वैज्ञानिकों को पूरी ताकत से काम करना होगा।

अच्छी गुणवत्ता वाला कपास पैदा करना लक्ष्य
चौहान ने कहा कि अलग-अलग राज्यों से आए किसानों की समस्याओं और मांगों को सुनकर उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। कपड़ा बनाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की जरूरत है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें प्रतिबद्धता से काम करना है। विकसित भारत में कपास बाहर से क्यों मंगवाना पड़े! अपने देश की जरूरत के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाला कपास पैदा करने की चुनौती और लक्ष्य हमारे सामने है, जिसके लिए हम सब एकजुट होकर प्रयास करेंगे।

हमें किसान और उद्योग दोनों का ध्यान रखना
शिवराज सिंह ने कहा कि वर्तमान में कपड़ा उद्योग जगत द्वारा विदेशों से कपास आयात के लिए आयात शुल्क खत्म करने की मांग की जाती है। किसान अपनी बात रखते हुए कहते है कि अगर बाहर से कपास सस्ता आएगा तो देश में हमारे कपास की कीमत भी कम हो जाएगी। इसलिए हमें किसान और उद्योग जगत दोनों का ध्यान रखना है।

आपको बता दने कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अनुभवों को दृष्टिगत रखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने फसलवार और राज्यवार बैठकें करने की घोषणा की थी। जिस क्रम में सबसे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में सोयाबीन को लेकर एक बृहद बैठक की और इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज कोयम्बटूर में कपास उत्पादकता को लेकर गहन चर्चा की तथा भावी रणनीतियों को लेकर विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे, विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर, आईसीएआर के महानिदेशक एम. एल. जाट, अधिकारीगण, हितधारक, वैज्ञानिक और किसान उपस्थित रहे।

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