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जलवायु परिवर्तन से किसान कैसे होंगे सुरक्षित? सरकार का जवाब

सरकार और ICAR मिलकर किसानों को जलवायु बदलाव से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। इसके तहत किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज, मौसम की जानकारी, प्रशिक्षण और फसल बीमा दिया जा रहा है। साथ ही ज

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Pooja Rai· Correspondent

3 दिसंबर 2025· 3 min read

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जलवायु परिवर्तन से किसान कैसे होंगे सुरक्षित? सरकार का जवाब

जलवायु परिवर्तन से किसान कैसे होंगे सुरक्षित? सरकार का जवाब

सरकार और ICAR मिलकर किसानों को जलवायु बदलाव से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। इसके तहत किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज, मौसम की जानकारी, प्रशिक्षण और फसल बीमा दिया जा रहा है। साथ ही जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसान ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद खेती कर सकें।

भारत में खेती पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के असर को समझने और किसानों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने NICRA परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत देश के 651 कृषि प्रधान जिलों का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि 310 जिले जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे ज्यादा खतरे में हैं, जिनमें से 109 बहुत ज्यादा संवेदनशील और 201 ज्यादा संवेदनशील हैं।यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रमणाथ ठाकुर ने लोकसभा में दी।

बनाए गए 448 क्लाइमेट रेजिलिएंट गांव
मंत्री ने बताया कि चयनित जिलों में किसानों को ड्रिप खेती, जीरो टिलेज, डायरेक्ट राइस सीडिंग, सूखा और गर्मी सहने वाली फसलें और धान के अवशेषों को खेत में मिलाकर मिट्टी सुधारना जैसी नई तकनीकें सिखाई जा रही हैं।इन तकनीकों के प्रदर्शन के लिए देशभर में 448 क्लाइमेट रेजिलिएंट गांव (Climate Resilient Villages) बनाए गए हैं। यहां बीज बैंक, नर्सरी और गांव स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि किसान आसानी से बीज और जानकारी प्राप्त कर सकें।

मौसम की सही जानकारी
कृषि मौसम सेवा (GKMS) के तहत किसानों को मौसम की सही जानकारी देने के लिए IMD अगले 5 दिनों का मौसम पूर्वानुमान जारी करता है। मौसम आधारित सलाह किसानों को SMS, टीवी, रेडियो और मोबाइल ऐप्स जैसे मेघदूत ऐप, मौसम ऐप और ग्राम मनचित्र और eGramSwaraj के जरिए मिलती है।

ये भी पढ़ें - मध्यप्रदेश बना देश का सबसे बड़ा औषधीय फसलों वाला राज्य, किसानों को मिल रही 50% तक सब्सिडी

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना
मंत्री ने बताया कि फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए सरकार ने प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) चलाई है। इस योजना के तहत सूखा, बाढ़, तूफान, कीट और बीमारी से होने वाले नुकसान का बीमा मिलता है। 2016 से अब तक किसानों को 1.90 लाख करोड़ रुपए का बीमा भुगतान किया जा चुका है।

3 साल में 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता
साथ ही, देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) लागू की गई है। इस योजना में किसानों को 3 साल में 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता दी जाती है। अब तक 16.90 लाख हेक्टेयर जमीन जैविक खेती में बदल चुकी है और 28 लाख से ज्यादा किसान लाभान्वित हुए हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि किसान वैज्ञानिक तकनीक से खेती करें, जलवायु परिवर्तन का सामना कर सकें और सुरक्षित व लाभदायक कृषि कर पाएं।

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