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किसान ऑनलाइन बेच सकते हैं अपनी फसल, जानिए घर बैठे e-NAM पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन,

नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी ई-नाम (e-NAM) एक ऑनलाइन मार्केटिंग साइट है, जिसके जरिए किसान, व्यापारी और खरीदार ऑनलाइन खरीद-बिक्री कर सकते हैं। यह प्लेटफार्म किसानों को पारदर्शिता और आर्थिक सुरक्षा का

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Pooja Rai· Correspondent

30 जुलाई 2024· 4 min read

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किसान ऑनलाइन बेच सकते हैं अपनी फसल, जानिए घर बैठे e-NAM पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन,

किसान ऑनलाइन बेच सकते हैं अपनी फसल, जानिए घर बैठे e-NAM पर कैसे करें रजिस्ट्रेशन,

नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी ई-नाम (e-NAM) एक ऑनलाइन मार्केटिंग साइट है, जिसके जरिए किसान, व्यापारी और खरीदार ऑनलाइन खरीद-बिक्री कर सकते हैं। यह प्लेटफार्म किसानों को पारदर्शिता और आर्थिक सुरक्षा का अवसर देता है। इस प्लेटफार्म के माध्यम से किसान अपनी उपज को देश के किसी भी राज्य में बेच सकते हैं। उपज को बेचने के साथ-साथ इसपर कृषि व्यापार से जुड़ी जानकारियां भी दी जाती है।इस पोर्टल पर किसानों के लिये फसलों की खरीद-बिक्री के साथ-साथ BHIM UPI के जरिये भुगतान करने की सुविधा भी मौजूद है।

किसानों की फ़सल अच्छी होने के बाद भी उन्हें फ़ायदा नहीं मिलता क्योंकि किसानों को उपज बेचने का सही प्लेटफार्म नहीं पता इसलिए बिचौलियों और आढ़तियों की जाल में फ़सकर किसान अपनी उपज को औने पौने दाम पर बेच देते हैं जिससे उनका काफ़ी नुक़सान होता है। किसान की इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी ई-नाम (e-NAM) एक ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाया है जहां किसानों को उनकी फ़सल का सही दाम मिलेगा।
बेशक केंद्र सरकार ने किसानों और व्यापारियों की सहूलियत के लिये e-NAM लॉन्च किया है, लेकिन जानकारी के अभाव के चलते किसान अभी-भी अपनी उपज की ऑनलाइन खरीद-बिक्री करने में कतरा रहे हैं। अगर किसान भी आसान शब्दों में ई-नाम पर खरीद-बिक्री और इसके काम करने का तरीका समझ जायें और फसलों के बाजिव दाम मिलेंगे ही, साथ ही अपनी उपज को देश के किसी भी मंडी में बेच पायेंगे। इससे बिचौलियों को दिये जाने वाला पैसा बचेगा।
ये भी पढ़ें -खरीफ फसलों की बुआई में पिछड़ा बिहार और झारखंड, दलहन का रकबा बढ़ा
कैसे काम करता है e-NAM

राष्ट्रीय कृषि बाजार ( e-NAM) योजना के तहत देशभर में मंडी व्यापारियों, डीलरों और आढ़तियों के भी लाइसेंस बनाये जाते हैं, जो सभी कृषि बाजारों में वैलिड होते हैं। इस तरह किसान अपनी उपज को अपने और दूसरे राज्य में भी बेच सकते हैं। इस प्लेटफार्म पर सबसे पहले रजिस्टर्ड व्यापारी और डीलर उपज की गुणवत्ता की जांच करता है और उसी आधार पर फसल की कीमत तय की जाती है। फिर रजिस्टर्ड व्यापारी, डीलर या आढ़ती द्वारा तय की गई कीमत को ई-नाम के पोर्टल पर चढ़ाया जाता है। इसके बाद ई-नाम के पोर्टल पर सुबह से 10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक किसान की उपज की बोली लगवाई जाती है।जो खरीददार उपज की सबसे ज्यादा कीमत लगाता है, किसान भी अपनी उपज उसी खरीददार को बेच सकता है और फसल की ज्यादा से ज्यादा कीमत ले सकते हैं।

e-NAM का फ़ायदा

ई-नाम यानी राष्ट्रीय कृषि बाजार का ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल पर पूरे भारत के किसान, व्यापारी, डीलर और आढ़तियों का एक रजिस्टर्ड नेटवर्क है। किसान को भी ई-नाम पर फसल की बेहतर कीमत मिल जाती है, क्योंकि एक मंडी का दायरा नहीं होता, बल्कि किसानों को देशभर की मंडियों से जोड़ा जाता है। किसानों के पास उपज को बेचने के लिये कई ऑपशन होते हैं। ई-नाम के ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल पर सारा काम किसानों के सामने ही होता है, इसलिये शोषण का मुद्दा ही नहीं रहता। ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है और किसान खुद उपज की बिक्री, व्यापारी और खरीददार की हर हरकत पर नजर रख सकता है।इस तरह ई-नाम (E-NAM) पर किसान को उपज की क्वालिटी के मुताबिक सही समय पर सही कीमत मिल जाती है।

आपको बता दें कि e-NAM के ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल पर सभी रजिस्टर्ड किसान, व्यापारी, डीलर और आढ़ती होते हैं, इसलिये धोखाधड़ी और शोषण का कोई रिस्क ही नहीं बनता। इसलिए किसान इस प्लेटफॉर्म की मदद से अच्छी बोली लगाने वाले व्यापारी से सीधा जुड़ सकते हैं और उपज का सही दाम ले सकते है।
किसान रजिस्ट्रेशन के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें.
1.enam.gov.in पर जाएं.
2.होम पेज पर 'Registration' पर क्लिक कर ई-मेल एड्रेस डालें।
3.एक टेंपररी लॉगिन आईडी आपके ई-मेल एड्रेस पर दी जाएगी।
4.e-NAM वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करने के लिए इससे लॉगिन करें।
5.KYC डीटेल्स और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर सबमिट करें।
इसके बाद एग्रीकल्चरल प्रोडूस मार्केट कमेटी (APMC) की मंजूरी के बाद आप कृषि उपज की ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं।

देखें ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है -

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