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कमाई की बात

समुद्र के रास्ते दुबई पहुंचा यूपी का दशहरी और लंगड़ा आम, किसानों को मिला ₹15-20 प्रति किलो ज्यादा दाम

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम पहली बार समुद्र के रास्ते सफलतापूर्वक दुबई भेजे गए। ICAR-CISH और APEDA की विकसित तकनीक की मदद से 25 दिन बाद भी करीब 90% आम अच्छी स्थिति में पहुंचे। इस तकनीक से किसानों को प्रति किलो 15-20 रुपये अधिक कीमत मिली और कम लागत में आम निर्यात का नया रास्ता खुला।

Pooja Rai

Pooja Rai·23 Jul 2026

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम पहली बार सफलतापूर्वक समुद्र के रास्ते दुबई भेजे गए हैं।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम पहली बार सफलतापूर्वक समुद्र के रास्ते दुबई भेजे गए हैं।

भारत के आम निर्यात के लिए एक बड़ी सफलता सामने आई है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम पहली बार सफलतापूर्वक समुद्र के रास्ते दुबई भेजे गए हैं। इस निर्यात में आईसीएआर-सीआईएसएच (ICAR-CISH), लखनऊ और एपीईडीए (APEDA) द्वारा तैयार किए गए विशेष समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया गया।

यह खेप अमरोहा की शहनाज़ एक्सपोर्ट ने अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से यूएई की प्रमुख रिटेल कंपनी लुलु ग्रुप को भेजी। इस पूरे प्रोजेक्ट में आईसीएआर-सीआईएसएच ने तकनीकी मार्गदर्शन और एपीईडीए ने जरूरी सहयोग दिया।

25 दिन बाद भी 90% आम अच्छी हालत में पहुंचे

आमों की तुड़ाई 22 जून 2026 को की गई थी। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से उनकी सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग की गई। आमों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित 'मेटवॉश' तकनीक से उपचारित किया गया, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ी।

इसके बाद आमों को 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में रखकर लगातार कोल्ड चेन के साथ समुद्र के रास्ते दुबई भेजा गया। पश्चिमी विक्षोभ के कारण जहाज पहुंचने में कुछ देरी हुई और खेप 17 जुलाई को दुबई पहुंची। यानी तुड़ाई से बाजार तक पहुंचने में 25 दिन लगे। इसके बावजूद करीब 90 प्रतिशत आम अच्छी और बिक्री योग्य स्थिति में मिले।


ये भी पढ़ें- 5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर

किसानों को मिला ज्यादा फायदा

समुद्री रास्ते से आम भेजने का खर्च हवाई मार्ग की तुलना में काफी कम होता है। यही वजह रही कि निर्यातकों ने किसानों से आम बेहतर कीमत पर खरीदे।

इस तकनीक की बदौलत आम उत्पादकों को प्रति किलो करीब 15 से 20 रुपये अतिरिक्त कीमत मिली। इससे किसानों की आय बढ़ी और भारतीय आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।

निर्यात के लिए खुलेंगे नए रास्ते

यह उत्तर प्रदेश से दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप मानी जा रही है। इसकी सफलता से यह साबित हुआ है कि अब भारतीय आमों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए समुद्र के रास्ते भी सुरक्षित और कम लागत में विदेश भेजा जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश समेत दूसरे आम उत्पादक राज्यों के किसानों को फायदा मिलेगा। आने वाले समय में खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और निर्यात लागत भी कम होगी।

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