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FSSAI का नया MRL फ्रेमवर्क भारतीय मसालों को वैश्विक बाजार में देगा मजबूती

दिल्ली। भारतीय मसाला उत्पादकों और निर्यातकों के लिए एक बड़ी खबर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) मसालों और जड़ी-बूटियों के लिए नया अधिकतम अवशेष स्तर MRL फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है, जि

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Thamir· Correspondent

27 फ़रवरी 2025· 2 min read

FSSAIIndian spices in the global marketMRL framework
FSSAI का नया MRL फ्रेमवर्क भारतीय मसालों को वैश्विक बाजार में देगा मजबूती

FSSAI का नया MRL फ्रेमवर्क भारतीय मसालों को वैश्विक बाजार में देगा मजबूती

दिल्ली। भारतीय मसाला उत्पादकों और निर्यातकों के लिए एक बड़ी खबर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) मसालों और जड़ी-बूटियों के लिए नया अधिकतम अवशेष स्तर MRL फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। इस नए MRL फ्रेमवर्क में स्वीकृत MRLs की संख्या को 11 से बढ़ाकर 98 कर दिया गया है, जिससे भारतीय मसालों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों में सुधार होगा।

FSSAI के पेस्टिसाइड अवशेषों पर वैज्ञानिक पैनल के उप-समिति के अध्यक्ष परेश शाह ने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य भारतीय मसालों के वैश्विक बाजार में पहुंच को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय मसालों के निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होगा, क्योंकि पुराने MRLs के कारण भारतीय मसालों का वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा में पीछे रहना पड़ा था। अब, नए MRL से मसालों के अस्वीकृत होने का खतरा भी कम होगा, जिससे निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर बेहतर व्यापारिक अवसर मिलेंगे।

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ऑल इंडिया स्पाइसेस एक्सपोर्टर्स फोरम द्वारा बेंगलुरु में आयोजित इंटरनेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2025 में शाह ने कहा, कि यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जो हमारी प्रतिस्पर्धा और बाजार में स्थिति को मजबूत करेगा।

भारत मसालों का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है, और वैश्विक मसाला व्यापार में उसका हिस्सा लगभग 25% है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारतीय मसालों का निर्यात 4.46 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, और निर्यात में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इस वित्तीय वर्ष के अप्रैल-जनवरी के आंकड़ों के अनुसार, निर्यात में 7.91% की वार्षिक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

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मसाला बोर्ड ने 2030 तक निर्यात को 4.4 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 10 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, गुणवत्ता नियंत्रण उपायों को कड़ा करते हुए यूरोपीय संघ, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों के लिए एथिलीन ऑक्साइड परीक्षण अनिवार्य किया गया है, जिससे खाद्य सुरक्षा और अनुपालन में सुधार हो सके।

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