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क्या है सरकार का MSP वाला प्रस्ताव जो नहीं माने किसान और आज 21फ़रवरी, को फिर दिल्ली कूच के लिये तैयार हैं किसान।

दिल्ली: आंदोलनरत किसान और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध ख़त्म ही नहीं हो रहा है। 18 फ़रवरी 2023 को चौथे दौर की बैठक में फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नरेंद्र मोदी सरकार ने जो प्रस्ताव रखा था

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Pooja Rai· Correspondent

21 फ़रवरी 2024· 3 min read

क्या है सरकार का MSP वाला प्रस्ताव जो नहीं माने किसान और आज 21फ़रवरी, को फिर दिल्ली कूच के लिये तैयार हैं किसान।

क्या है सरकार का MSP वाला प्रस्ताव जो नहीं माने किसान और आज 21फ़रवरी, को फिर दिल्ली कूच के लिये तैयार हैं किसान।

दिल्ली: आंदोलनरत किसान और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध ख़त्म ही नहीं हो रहा है। 18 फ़रवरी 2023 को चौथे दौर की बैठक में फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नरेंद्र मोदी सरकार ने जो प्रस्ताव रखा था, किसानों ने उसे ख़ारिज कर दिया है और कहा कि वो 21 फ़रवरी की सुबह अपना 'दिल्ली चलो' मार्च फिर से शुरू करेंगे। किसान नेताओं का कहना है कि सरकारी प्रस्ताव में स्पष्टता नहीं है और वो उनके हित में भी नहीं है।

किसानों की दो प्रमुख मांगें क्या हैं?

पहली कि सरकार MSP गारंटी पर क़ानून बनाए। भले ही सरकार उनकी पूरी फसल न ख़रीदे, पर अगर किसान खुले बाज़ार में भी अपनी उपज बेचता है, तो उसे न्यूनतम क़ीमत की गारंटी मिले।क़ानून बन जाने से सरकार, प्राइवेट कंपनियां या पब्लिक सेक्टर एजेंसियां, कोई भी मनमाने दाम पर फसल नहीं ख़रीद पाएगा।

दूसरी ये है कि MSP गारंटी के साथ किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करवाना चाहते हैं। इसके अलावा किसानों और खेतिहर मज़दूरों को पेंशन मिले, बिजली दरों में बढ़ोतरी न हो, किसानों का क़र्ज़ माफ़ हो, भूमि अधिग्रहण अधिनियम (2013) बहाल किया जाए, लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में न्याय मिले, 2020-21 में हुए आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवज़ा दिया जाए और पुलिस ने जो मामले दर्ज किए थे, वो भी वापस लिए जाएं।

क्या था सरकार का MSP वाला प्रस्ताव?

मसूर, उड़द, तुअर, मक्का और कपास उगाने वाले किसानों के साथ दो सहकारी एजेंसियां NCCF (राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ) और NAFED (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ) 5 साल का एग्रीमेंट करेंगी, और इस एग्रीमेंट के ज़रिए सीधे किसानों से ये फसलें MSP पर ख़रीदी जाएंगी।
ख़रीद की मात्रा पर कोई सीमा नहीं होगी और इसके लिए एक पोर्टल बनाया जाएगा।
इससे पहले, 18 फरवरी की रात केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि साल 2004 से 2014 के बीच UPA सरकार ने केवल साढ़े 5 लाख करोड़ रुपये की फसलों की ख़रीद MSP पर की थी और मोदी सरकार ने बीते दस सालों में 18 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की ख़रीद की है।

फिर किसान क्यों नहीं माने ये प्रस्ताव?

किसान इस प्रस्ताव से ख़ुश नहीं हैं क्योंकि उनका ये कहना है कि केवल पांच नहीं बल्कि सभी 23 फ़सलों पर MSP की गारंटी चाहिए।

किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने शंभू सीमा पर मीडिया से कहा की "हम सरकार से अपील करते हैं कि या तो हमारे मुद्दों का समाधान करें या बैरिकेड हटा दें और हमें शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए दिल्ली जाने की अनुमति दें।"

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