Skip to content
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी सलाह
एग्री बुलेटिन

पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी सलाह

दिसंबर से जनवरी के बीच पाला और शीतलहर रबी फसलों के लिए बड़ा खतरा होती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी बनाए रखें, संतुलित खाद का उपयोग करें, कीट-रोगों की निगरानी करें

NP

Pooja Rai· Correspondent

13 दिसंबर 2025· 5 min read

advice for farmersagriculture newsfrost and cold waves
पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी  सलाह

पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी सलाह

दिसंबर से जनवरी के बीच पाला और शीतलहर रबी फसलों के लिए बड़ा खतरा होती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी बनाए रखें, संतुलित खाद का उपयोग करें, कीट-रोगों की निगरानी करें और पुआल या घास से मल्चिंग करें। गेहूं, सरसों, दलहन, सब्ज़ी, बागवानी फसलों और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए समय पर सिंचाई, उचित दवा और वैज्ञानिक सलाह लेकर ही उपाय अपनाने की जरूरत है।

दिसंबर के मध्य से लेकर जनवरी के अंत तक का समय किसानों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान पाला और तेज शीतलहर का खतरा सबसे ज़्यादा रहता है। जब तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो रबी की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। गेहूं, जौ, आलू, सरसों, मटर, टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, मिर्च और कद्दू वर्ग की सब्ज़ियां इस मौसम में सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र-2, कटिया (सीतापुर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दया एस. श्रीवास्तव के अनुसार, पाले की स्थिति में पौधों की कोशिकाओं के अंदर बर्फ जम जाती है, जिससे कोशिकाएं फट जाती हैं और पौधा झुलसकर मर सकता है। इसलिए इस मौसम में सही समय पर सही उपाय करना बहुत जरूरी है।

खेती के लिए सामान्य सलाह
किसानों को अपने खेतों को साफ रखना चाहिए और खरपतवारों को समय पर निकाल देना चाहिए। खाद और उर्वरक का इस्तेमाल मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही करें। नाइट्रोजन की अधिक मात्रा ठंड में फसलों को कमजोर बना देती है, इसलिए इसका जरूरत से ज्यादा प्रयोग न करें। जैव उर्वरकों और बायो एनपीके को प्राथमिकता दें। खेत में फसल के अवशेष न जलाएं और जड़ों के आसपास पुआल, सूखी घास या पॉलीथीन शीट बिछाकर मल्चिंग करें, ताकि मिट्टी की गर्मी बनी रहे।

कीट और रोगों से बचाव के लिए खेत की नियमित निगरानी जरूरी है। रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए पीले और नीले चिपचिपे पाश 25-30/ एकड़ सभी फसलों में लगाएं। पत्ती खाने वाले और फल बेधक कीटों के लिए फेरोमोन ट्रैप और सोलर लाइट ट्रैप का इस्तेमाल करें।कीट नियंत्रण हेतु नीम या करजं के तेल का छिड़काव 2 मिलीली/ली पानी के हिसाब से करें।

गेहूं, सरसों और दलहन की देखभाल
गेहूं की पहली सिंचाई बुवाई के 21–25 दिन बाद जरूर करें और उसी समय खरपतवार नियंत्रण भी करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए 2,4-D, क्लोडिनोफॉप, मेट्रीब्यूजीन जैसे शाकनाशी 2-3 पत्ती की अवस्था पर विशेषज्ञ की निगरानी में ही उपयोग किए जाएँ। देर से बुवाई के लिए HD-3298 किस्म उपयुक्त मानी गई है। जिंक सल्फेट के प्रयोग से जड़ों का विकास बेहतर होता है।

सरसों की फसल में पौधों की संख्या ज्यादा हो तो विरलीकरण जरूर करें। पर्णीय धब्बा रोग दिखने पर मेटालैक्सिल+मैकोंजेब का छिड़काव करें। सरसों मे सल्फर का प्रयोग अवश्य करें। चना और मसूर की फसल में फ्यूजेरियम विल्ट और ब्लाइट से बचाव के लिए कापर आक्सी क्लोराइड 2 ग्राम/ली पानी का एक सुरक्षात्मक छिड़काव करें ।

सब्ज़ियों की फसल में सावधानी
सब्ज़ियों में रस चूसक कीटों से बचाव के लिए पीला चिपचिपा पाश, लकड़ी की राख का बुरकाव और नीम तेल का छिड़काव करें। रोगों से बचाव के लिए जैविक घोल या कॉपर आधारित दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। अत्यधिक प्रकोप की स्थित मे इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/ली पानी का छिड़काव करें। रोग प्रबंधन हेतु सयूडोमोनास 5मिली/ली पानी, बैसिलस सबटिटलिस 5 मिली/ली पानी या कापर आक्सी क्लोराइड 2 ग्राम/ली पानी का छिड़काव करें।

ये भी पढ़ें - FPOs को मजबूत करने के लिए योजना का विस्तार जरूरी: कृषि सचिव

पशुओं की देखभाल
ठंड के मौसम में पशुओं की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। पशुशाला को चारों ओर से ढककर रखें और साफ-सफाई का ध्यान दें। पशुओं को जूट के बोरे पहनाएं और बैठने की जगह पर शाम को पुआल बिछाएं। आहार में मिनरल मिक्सचर, गुड़ और चना शामिल करें। दूध देने वाले पशुओं को सुबह-शाम गुनगुना पानी देना लाभकारी होता है।

बागवानी फसलों की सुरक्षा
आम और अमरूद में काले फफूंद से बचाव के लिए कार्बेंडाजिम + मैकोंजेब फफूदनाशक 2 ग्राम/ली एवं इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/ली+ नीम का तेल 2मिली/ली का एक सप्ताह के अंतराल पर छिड़काव करें।केले की पत्तियों मे झुलसा (सिगाटोका) रोग से बचाव हेतु प्रोपीकोनाजोल 2 मिली/ली पानी का छिड़काव करें। नीबू की पत्तियों में सिट्रस कैंकर (भूरा धब्बा) से बचाव हेतु कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45 ग्राम व स्ट्रेपटो माइसीन सल्फेट 2 ग्राम को 15 ली पानी मे मिलाकर छिड़काव करें।

कोहरा और पाला से बचाव के उपाय
खेतों में हल्की नमी बनाए रखें। रात के समय खेतों के किनारे सूखी घास या नीम की पत्तियों का धुआं करें। पाला पड़ने की स्थिति में स्प्रिंकलर से लगातार पानी का छिड़काव करें।
1. जैसे थायोयूरिया (Thiouria) खुराक: 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इससे कोहरे से होने वाले नुकसान के प्रति सुरक्षा मिलता है।
2.घुलनशील सल्फर (80% WP) | 2 से 2.5 ग्राम प्रति 1.5 से 2 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़। ये पत्तियों का तापमान लगभग 2-2.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ा देता है। |
3.व्यावसायिक सल्फ्यूरिक एसिड | 0.1% घोल (10 मिलीलीटर 10 लीटर पानी में)। | पत्तियों का तापमान बढ़ाता है। (केवल विशेषज्ञ की देखरेख में अत्यंत सावधानी से प्रयोग करें।)
4.पत्तियों में जीवाणु झुलसा रोग से बचाव हेतु कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (COC) 2 ग्राम/ली का छिड़काव करे |
5.पोटेशियम नाइट्रेट (1%) या 1% पोटाश | पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray) करें। | कोशिका के घोल की सान्द्रता बढ़ाकर पाले के तनाव के प्रति पौधे की सहनशीलता को बढ़ाता है। |

मौसम की भविष्यवाणी पर नजर रखें
डॉ. श्रीवास्तव ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम की भविष्यवाणी पर लगातार नजर रखें और किसी भी रासायनिक दवा के प्रयोग से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। सही समय पर सही कदम उठाकर पाला और ठंड से फसलों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी सलाह

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs