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Wheat Stock Limit: बढ़ती कीमत और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई, कहा- देश के पास पर्याप्‍त गेहूं

गेहूं (Wheat) की कीमतों (Wheat Price) को कम करने और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने तत्‍काल प्रभाव से गेहूं पर स्टॉक-होल्डिंग (Wheat Stock Holding) सीमा फिर से लगा दी

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Indal· Correspondent

25 जून 2024· 4 min read

Wheat Stock Limit: बढ़ती कीमत और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई, कहा- देश के पास पर्याप्‍त गेहूं

Wheat Stock Limit: बढ़ती कीमत और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई, कहा- देश के पास पर्याप्‍त गेहूं

गेहूं (Wheat) की कीमतों (Wheat Price) को कम करने और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने तत्‍काल प्रभाव से गेहूं पर स्टॉक-होल्डिंग (Wheat Stock Holding) सीमा फिर से लगा दी है। सरकार ने कहा है कि वह कीमतों में कमी लाने के लिए सभी विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार है। सरकार गेहूं पर 40 प्रतिशत आयात शुल्क लगाती है, जबकि उपकर और अधिभार के कारण प्रभावी शुल्क लगभग 44 प्रतिशत है। मार्च 2024 में समाप्त होने वाली स्टॉक सीमा को फिर से लागू करने का निर्णय तब लिया गया, जब वित्त वर्ष 24 में गेहूं का उत्पादन 112 मिलियन टन से अधिक होने की उम्मीद है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है और केंद्र के पास सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार है। हमारे पास लगभग 7.5 मिलियन टन गेहूं का शुरुआती स्टॉक था, जबकि पिछले साल 1 अप्रैल को शुरुआती स्टॉक 8.2 मिलियन टन था। इसलिए इस साल स्टॉक शुरू में 0.7 मिलियन टन कम है। इसके अलावा इस साल अब तक गेहूं की खरीद 26.6 मिलियन टन है जो पिछले साल की तुलना में 0.4 मिलियन टन अधिक है। इसलिए कुल मिलाकर उपलब्धता पिछले साल की तुलना में सिर्फ 0.3 मिलियन टन कम है, इसलिए देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है।

गेहूं की जमाखोरी रोकने के ल‍िए Stock limit

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सट्टेबाजों को दूर रखने और व्यापारियों द्वारा अपने स्टॉक को जमा करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए स्टॉक-होल्डिंग सीमा को फिर से लागू किया जा रहा है और यह 31 मार्च 2025 तक प्रभावी रहेगा। चोपड़ा ने कहा कि गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध या चावल निर्यात पर अंकुश हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। बड़ी चेन खुदरा विक्रेताओं के खुदरा दुकानों और व्यक्तिगत स्टोरों को 10 टन तक गेहूं का स्टॉक करने की अनुमति है। व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी चेन खुदरा विक्रेताओं के बड़े डिपो में प्रत्येक के लिए 3,000 टन की सीमा है।

यह भी पढ़ें- प्याज, आलू सहित बागवानी फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान, देखिए पूरी लिस्ट

प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए सीमा उनकी मासिक स्थापित क्षमता (एमआईसी) के 70 प्रतिशत पर निर्धारित की गई है, जिसे 2024-25 के शेष महीनों से गुणा किया गया है। सरकार ने सभी संस्थाओं को अपने स्टॉक की स्थिति घोषित करने और उन्हें नियमित रूप से खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर अपडेट करने को कहा है।

निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखने वालों को नए मानदंडों का पालन करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। यह निर्णय पिछले सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्रालय और सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें अधिकारियों से गेहूं की कीमतों पर बारीकी से नजर रखने को कहा गया था। सरकार ने कहा है कि वह उपभोक्ताओं के लिए मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है।

ज्‍यादा तापमान की वजह से प्रभावित हुइा गेहूं का उत्‍पादन

चोपड़ा ने कहा कि इस साल गेहूं की खरीद, विशेष रूप से मध्य प्रदेश में, लक्ष्य से कम रही है, क्योंकि वहां फसल को प्रभावित करने वाली कुछ चिंताएं हैं क्योंकि पिछली सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक था और किसानों ने अपनी उपज निजी व्यापारियों को बेच दी क्योंकि उन्हें अधिक कीमत मिल रही थी।

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि गेहूं और गेहूं के आटे की कीमतें पिछले साल की तुलना में 2 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई हैं। 20 जून तक, गेहूं का औसत खुदरा मूल्य 30.99 रुपये प्रति किलोग्राम था जो एक साल पहले 28.95 रुपए था। गेहूं के आटे की कीमतें पिछले साल 34.29 रुपए के मुकाबले बढ़कर 36.13 रुपए हो गई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि तुअर (अरहर) पर लगाई गई स्टॉक सीमा के नतीजे सामने आने लगे हैं और आदेश के बाद प्रमुख केंद्रों में कीमतों में 50-200 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी आई है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास प्याज का अच्छा स्टॉक है और अच्छे मानसून से फसल का रकबा बढ़ना चाहिए।

खरे ने कहा, "हमने इस खरीफ में करीब 353,000 हेक्टेयर में प्याज उगाने का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले साल रकबा 285,000 हेक्टेयर था और उम्मीद है कि लक्ष्य पूरा हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि खरीफ प्याज की थोड़ी देर से कटाई फायदेमंद रही क्योंकि इससे यह सुनिश्चित हुआ कि त्योहारी सीजन के दौरान अधिकतम आपूर्ति शुरू हो गई, जब आमतौर पर प्याज की मांग अधिक होती है।

गेहूं की खेती के ल‍िए काम का वीड‍ियो

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