Skip to content
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?
एग्री बुलेटिन

IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

जनवरी-फरवरी 2026 में तापमान बढ़ने के अनुमान से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ी है, लेकिन ICAR के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार असर सीमित रहेगा। अब ज्यादातर क्षेत्रों में गर्मी सहन करने वाली नई गेहूं कि

NP

Pooja Rai· Correspondent

3 जनवरी 2026· 3 min read

agricultureagriculture newsicar
IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

जनवरी-फरवरी 2026 में तापमान बढ़ने के अनुमान से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ी है, लेकिन ICAR के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार असर सीमित रहेगा। अब ज्यादातर क्षेत्रों में गर्मी सहन करने वाली नई गेहूं किस्में बोई जा रही हैं और अगेती बुवाई से भी जोखिम कम हुआ है। बेहतर किस्मों और बढ़े बुवाई रकबे के चलते इस सीजन में भी अच्छे उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तर भारत में जनवरी की शुरुआत में मौसम को लेकर गेहूं किसानों की चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि इस बार हालात पहले जितने खराब नहीं होंगे। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि जनवरी 2026 में उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से थोड़ा ज्यादा रह सकता है। यही वजह है कि किसान सतर्क हैं, क्योंकि फरवरी का महीना गेहूं में दाना भरने का सबसे अहम समय होता है।

ICAR ने क्या कहा?
हालांकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब गेहूं की खेती में बड़ा बदलाव आ चुका है। पिछले कुछ सालों में ऐसी नई किस्में विकसित की गई हैं, जो आखिरी समय की गर्मी को सहन कर सकती हैं। ICAR के अनुसार उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के करीब 75 प्रतिशत इलाके में अब DBW 187, HD 3226 और HD 3086 जैसी गर्मी सहने वाली किस्में बोई जा रही हैं, जिससे नुकसान का खतरा कम हो गया है।

ये भी पढ़ें - टमाटर के फल क्यों फट रहे हैं? बीमारी या पोषक तत्व की कमी — जानिए कृषि वैज्ञानिक से

कितना डिग्री तापमान सही?
एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक बताते हैं कि तापमान बढ़ने का समय सबसे ज्यादा मायने रखता है। अगर फरवरी के बीच तक दिन का तापमान 26–27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, तो फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। लेकिन अगर लंबे समय तक तापमान 28–29 डिग्री या उससे ऊपर चला जाए, तभी उत्पादन प्रभावित होता है।इसके अलावा ICAR ने अगेती बुवाई के लिए भी खास किस्में तैयार की हैं, जिन्हें अक्टूबर में बोया जाता है। इनमें फरवरी तक दाना भरने का काम लगभग पूरा हो जाता है, जिससे बाद की गर्मी का असर कम पड़ता है।

119 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य
मौसम के बावजूद पिछले साल का अनुभव भी उम्मीद जगाने वाला है। फरवरी 2025 पिछले 100 सालों में सबसे गर्म महीनों में से एक रहा, फिर भी देश ने रिकॉर्ड 117.94 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन किया। इस बार भी बुवाई का रकबा पिछले साल से ज्यादा है और सरकार ने 2025-26 के लिए 119 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। वैज्ञानिकों को भरोसा है कि बदली खेती तकनीक और नई किस्मों के सहारे यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs