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ICAR की 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित कीं। ये किस्में अधिक उपज देने वाली, जलवायु-सहनशील और रोग-प्रतिरोधी हैं। उन्होंने बताया क

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Pooja Rai· Correspondent

5 जनवरी 2026· 3 min read

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ICAR की 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित

ICAR की 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित कीं। ये किस्में अधिक उपज देने वाली, जलवायु-सहनशील और रोग-प्रतिरोधी हैं। उन्होंने बताया कि 1969 से अब तक 7205 फसल किस्मों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 3236 पिछले 11 वर्षों में विकसित हुईं। मंत्री ने कहा कि भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर 150.18 मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया है और देश विश्व का ‘फूड बास्केट’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 जनवरी को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में देश को समर्पित कीं। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स के ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जिसमें वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद रहे।

बेहतर बीज ही खेती की सबसे बड़ी ताकत
इस मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि बेहतर बीज ही खेती की सबसे बड़ी ताकत हैं। देश में वर्ष 1969 से अब तक 7205 फसल किस्मों को मंजूरी दी जा चुकी है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में ही 3236 नई उच्च उत्पादक किस्में विकसित की गई हैं, जो पहले की तुलना में तेज प्रगति को दर्शाता है।

नई किस्मों की खासियत
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जारी की गई नई किस्में ज्यादा उपज देने वाली, बेहतर गुणवत्ता वाली और जलवायु के अनुकूल हैं। इनमें कई किस्में सूखा, बाढ़, लवणीय मिट्टी और रोग-कीटों को सहन करने में सक्षम हैं, जिससे किसानों को बदलते मौसम में भी फायदा होगा।उन्होंने कहा कि आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों के साझा प्रयास से यह बड़ी सफलता मिली है। इससे किसानों की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और आमदनी में इजाफा होगा।

चावल उत्पादन में रिकॉर्ड
कृषि मंत्री ने बताया कि भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए 150.18 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। उन्होंने कहा कि भारत अब न सिर्फ अपने देश के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अन्न उत्पादन करने की क्षमता रखता है और ‘विश्व का फूड बास्केट’ बनने की ओर बढ़ रहा है।

ये भी पढ़ें - IMD का अनुमान, जनवरी में सामान्य से ज़्यादा रहेगा तापमान, ICAR ने क्या कहा?

किस फसल की कितनी किस्में
कार्यक्रम में बताया गया कि जारी की गई किस्मों में धान की 60, मक्का की 50 नई किस्में प्रमुख हैं। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, लघु मिलेट्स और प्रोसो मिलेट की भी उन्नत किस्में शामिल हैं, जो पोषण सुरक्षा और जलवायु सहनशीलता को मजबूत करेंगी। वहीं दलहन की 6, तिलहन की 13, कपास की 24, गन्ने की 6, और चारा फसलों की 11 किस्में शामिल हैं।इनसे पोषण सुरक्षा, पशुपालन और किसानों की आमदनी को मजबूती मिलेगी।

'नई किस्में जल्द किसानों तक पहुंचें'
इस अवसर पर राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) की ओर से 33.26 करोड़ रुपये का लाभांश चेक कृषि मंत्री को सौंपा गया।कार्यक्रम में कृषि मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित रहे।कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि तीन साल के भीतर ये सभी नई किस्में किसानों तक पहुंचें, ताकि खेती मजबूत हो और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

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