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सरसों की बुवाई में 4.3% की बढ़ोतरी, राजस्थान से यूपी तक सरसों की फसल ने पकड़ी रफ्तार

देश में इस साल सरसों की खेती का रकबा बढ़ा है। 15 दिसंबर 2025 तक बुवाई करीब 84.67 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल से 4.3% ज्यादा है। राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बढ़ोतरी

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Pooja Rai· Correspondent

24 दिसंबर 2025· 3 min read

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सरसों की बुवाई में 4.3% की बढ़ोतरी, राजस्थान से यूपी तक सरसों की फसल ने पकड़ी रफ्तार

सरसों की बुवाई में 4.3% की बढ़ोतरी, राजस्थान से यूपी तक सरसों की फसल ने पकड़ी रफ्तार

देश में इस साल सरसों की खेती का रकबा बढ़ा है। 15 दिसंबर 2025 तक बुवाई करीब 84.67 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल से 4.3% ज्यादा है। राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ज्यादातर राज्यों में फसल की हालत सामान्य है, कीटों का असर कम है और अनुकूल मौसम से फसल की बढ़वार अच्छी बनी हुई है।

देशभर में इस साल सरसों की खेती का रकबा बढ़ा है। 15 दिसंबर 2025 तक सरसों की बुवाई करीब 84.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 81.16 लाख हेक्टेयर थी। यानी सरसों के रकबे में करीब 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

एग्रीवॉच द्वारा तैयार रबी सीजन 2025–26 की सरसों फसल निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में सरसों की खेती में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने 2025–26 के लिए सरसों फसल सर्वे की जिम्मेदारी एग्रीवॉच को दी है।

फसल की स्थिति कैसी है?
ज्यादातर राज्यों में सरसों की फसल इस समय शाखा निकलने से लेकर फूल और फल (फली) बनने की अवस्था में है। जो फसल जल्दी बोई गई थी, वह अब दाना बनने की अवस्था में पहुंच चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्यों में फसल की हालत सामान्य है और कीटों का प्रकोप आर्थिक नुकसान के स्तर से नीचे है।दिसंबर 2025 के पहले पखवाड़े में बारिश नहीं हुई। अनुकूल तापमान, मिट्टी में नमी और सिंचाई की सुविधा से फसल की बढ़वार अच्छी रही।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश
राजस्थान में सरसों की बुवाई समय पर हुई, लेकिन सितंबर-अक्टूबर में ज्यादा बारिश के कारण कुछ निचले इलाकों में दोबारा बुवाई करनी पड़ी। अब मौसम साफ रहने से फसल ने अच्छी रिकवरी की है। फसल 35–50 दिन की है और ज्यादातर खेतों में फूल आने लगे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में अक्टूबर की बेमौसम बारिश से कुछ जगह अंकुरण प्रभावित हुआ था, लेकिन नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में मौसम अनुकूल रहने से फसल संभल गई। फिलहाल फसल 45–60 दिन की है और फूल से लेकर फली बनने की अवस्था में है।

ये भी पढ़ें - 5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर

मध्य प्रदेश और हरियाणा
मध्य प्रदेश में अक्टूबर के आखिर में ज्यादा बारिश से फसल को नुकसान हुआ था, खासकर निचले इलाकों में। बाद में साफ मौसम और अच्छी नमी से फसल उबर गई। यहां फसल अभी फूल और फली बनने की अवस्था में है।वहीं हरियाणा में बुवाई समय पर हुई। अक्टूबर की बारिश से कुछ जगह असर पड़ा, लेकिन बाद में मौसम अनुकूल रहा। यहां फसल की हालत अच्छी है और कीटों का खास प्रकोप नहीं है।

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य
पश्चिम बंगाल में सरसों की बुवाई धीरे-धीरे हुई। नवंबर की शुरुआत में ज्यादा बारिश से कुछ जिलों में फसल प्रभावित हुई, लेकिन बाद में मौसम साफ रहने से स्थिति सुधर गई।असम की बात करें वहाँ बुवाई पूरी हो चुकी है, फसल 20–35 दिन की है।वहीं गुजरात में फसल फूल से लेकर दाना बनने की अवस्था में है।जबकि बिहार में समय पर बुवाई हुई और फसल की बढ़वार अच्छी है।

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