Skip to content
News Potli
एग्री बुलेटिन

सरकारी नीतियों से प्याज किसानों को नुकसान, एसोसिएशन का आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र स्टेट अनियन ग्रोअर्स फार्मर्स एसोसिएशन के फाउंडर प्रेसिडेंट भारत दिघोले ने आरोप लगाया है कि मार्केट में केंद्र के दखल की वजह से पूरे भारत में प्याज उगाने वालों को 2025 में भारी आर्थ‍

NP

Mithilesh· Correspondent

1 जनवरी 2026· 2 min read

सरकारी नीतियों से प्याज किसानों को नुकसान, एसोसिएशन का आरोप

सरकारी नीतियों से प्याज किसानों को नुकसान, एसोसिएशन का आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र स्टेट अनियन ग्रोअर्स फार्मर्स एसोसिएशन के फाउंडर प्रेसिडेंट भारत दिघोले ने आरोप लगाया है कि मार्केट में केंद्र के दखल की वजह से पूरे भारत में प्याज उगाने वालों को 2025 में भारी आर्थ‍िक नुकसान हुआ है। एसोसिएशन ने 2025 में हुए नुकसान के लिए किसानों को डायरेक्ट सब्सिडी के जरिए मुआवजा देने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे विरोध करेंगे।

नासिक में मौजूद एसोसिएशन के हेड दिघोले ने कहा कि किचन की इस जरूरी चीज की कीमतें प्रोडक्शन कॉस्ट से बहुत कम हैं। उन्होंने एक बयान में कहा कि प्रोडक्शन कॉस्ट 22 रुपए से 25 रुपए प्रति क‍िलो के बीच थी, जबकि 2025 के दौरान एवरेज मार्केट प्राइस सिर्फ़ 8 रुपए से 18 रुपए प्रति क‍िलोग्राम के बीच थे।

ये खबरें भी पढ़ें- IFFCO का नया प्राकृतिक उत्पाद ‘धर्मामृत’ लॉन्च, नैनो उर्वरकों के साथ टिकाऊ खेती पर फोकस

महाराष्ट्र की सभी मार्केट कमेटियों से इकट्ठा किए गए डेटा का हवाला देते हुए, बयान में कहा गया है कि किसानों को प्याज का औसत दाम जनवरी में 20 रुपए प्रति किलो, फरवरी में 22 रुपए, मार्च में 14 रुपए, अप्रैल में 8 रुपए, मई में 9 रुपए, जून में 13, जुलाई और अगस्त में 12, सितंबर में 9, अक्टूबर में 10, नवंबर में 12, 1 से 15 दिसंबर तक 14-15 रुपए और 15 दिसंबर के बाद 18 रुपए प्रति क‍िलो पर रहा।

डिघोले ने कहा, "ये दाम प्रोडक्शन कॉस्ट से बहुत कम हैं और किसानों के नुकसान और बढ़ते कर्ज का मुख्य कारण हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि देश में प्याज की काफी उपलब्धता के बावजूद, सरकार ने बफर स्टॉक बनाने के लिए NAFED (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन) और NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन) के जरिए लगभग 3 लाख टन प्याज खरीदा।

NP

About the Author

Mithilesh

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min