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यूपी: हरे प्याज की खेती और सब्ज़ियों की नर्सरी, 2.5 एकड़ में किसान कमा रहा 6-7 लाख रुपये

बहराइच (उत्तर प्रदेश)। साल 2013 की बात है बहराइच के राम प्रवेश मौर्या के 4 भाइयों में पारिवारिक विवाद हो गया। उस समय राम प्रवेश मौर्या पास के कस्बे मिहींपुरवा में किराना और सब्जी की दुकान चलाते थे। बं

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19 नवंबर 2024· 3 min read

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यूपी: हरे प्याज की खेती और सब्ज़ियों की नर्सरी,  2.5 एकड़ में किसान कमा रहा 6-7 लाख रुपये

यूपी: हरे प्याज की खेती और सब्ज़ियों की नर्सरी, 2.5 एकड़ में किसान कमा रहा 6-7 लाख रुपये

बहराइच (उत्तर प्रदेश)। साल 2013 की बात है बहराइच के राम प्रवेश मौर्या के 4 भाइयों में पारिवारिक विवाद हो गया। उस समय राम प्रवेश मौर्या पास के कस्बे मिहींपुरवा में किराना और सब्जी की दुकान चलाते थे। बंटवारे में वो दुकान उनके हाथ से चली गई।

राम प्रवेश के 4 बच्चे थे और रोजगार का जरिया कुछ नहीं। हिस्से में उनके पास 2.5 एकड़ से ज्यादा जमीन जरुर आई थी ( देश में 84 फीसदी किसानों के पास 2.5 एकड़ या उससे कम जमीन है, कम होती जोत खेती से पलायन की बड़ी वजह भी है।) उन्होंने सोचा कि अगर Delhi -Mumbai जैसे शहरों में कमाने चला गया तो बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे, इसलिए गांव में रहकर सब्जियों की खेती का फैसला लिया। उन्होंने सब्जियों की खेती शुरु की। वो अच्छी कंपनियों का बीज लाते और नर्सरी उगाकर सब्जियां तैयार करते। कुछ आदमनी होने लगी थीं। बच्चों की पढ़ाई चलने लगी थी।

पत्नी के साथ अपनी नर्सरी में काम करते राम प्रवेश मौर्या। फोटो- धीरज

कृषि विज्ञान केंद्र के साथ से आसान हुई राह

इसी बीच वो कृषि विज्ञान केंद्र नानपारा के संपर्क में आए। एक सरकारी योजना के तहत उन्हें खरीफ का 100-200 ग्राम बीज मिला। केवीके नानपारा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसबी सिंह बताते हैं, "उस साल 10 किसानों को ये बीज दिया गया था लेकिन सिर्फ राम प्रवेश ही वो फसल उगा पाए", इससे उन्हें अच्छी आदमनी हुई। उन्होंने हरा और तैयार प्याज दोनों बेचकर कुछ 70-80 हजार रुपए कमाए।" डॉ. सिंह आगे बताते हैं, किसान की मेहनत देखकर कृषि विज्ञान केंद्र ने उन्हें और बीज उपलब्ध करवाए साथ ही तकनीक मदद और ट्रेनिंग भी दिलाई।"

राम प्रवेश मौर्या का वीडियो यहां देखिए-

उन्नत बीज कंपनियों के उगाते हैं नर्सरी

राम प्रवेश की प्याज की खेती और नर्सरी का काम चल निकला। अब उनके पास दर्जनों कंपनियों की किस्मों की सब्जियों की पौध मिलती है। घर के पास छोटी सी जमीन में उगाकर वो सिर्फ बहराइच ही नहीं, आसपास के कई जिलों में पौध भेजते हैं। दिल्ली या बेंगलुरु की कंपनियों के कर्मचारी उन्हें सीधे संपर्क करते हैंँ।

राम प्रवेश मौर्या ने इसी जमीन के सहारे बच्चों को बढ़ाया और घर चलाया। उनके एक बेटा कुछ दिन पहले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से JRF में सेलेक्ट हुआ है, एक बेटा प्राइवेट स्कूल में शिक्षक, एक बेटा कृषि से बीएसई कर रहा है। राम प्रवेश मौर्या उन किसानों के लिए प्रेरणा हैं, जो कम जमीन के चलते खेती छोड़ देते हैं या फिर धान-गेहूं की खेती के चक्र में फंसे रहते हैं। देश के 84 फीसदी किसानों के पास 2 से 2.5 एकड़ ही जमीन है।

राम प्रवेश मौर्या गमलों और बैग में भी सब्जियां उगाते हैं, उन्हें यूपी में होने वाली प्रदेश स्तर की शाकभाजी प्रदर्शनी में पुरस्कार भी मिल चुका है।

खेती किसानी से जुड़े वीडियो यहां देखिए

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