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बीजों की नई किस्में जरूरी, लेकिन पुरानी किस्मों को भी बचाना होगा: केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नई बीज किस्में जरूरी हैं, लेकिन पुरानी किस्मों को बचाना भी उतना ही अहम है। उन्होंने किसानों को बीज संरक्षण के लिए सम्मानित किया और बताया कि सरकार इसके

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Pooja Rai· Correspondent

13 नवंबर 2025· 3 min read

बीजों की नई किस्में जरूरी, लेकिन पुरानी किस्मों को भी बचाना होगा: केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान

बीजों की नई किस्में जरूरी, लेकिन पुरानी किस्मों को भी बचाना होगा: केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नई बीज किस्में जरूरी हैं, लेकिन पुरानी किस्मों को बचाना भी उतना ही अहम है। उन्होंने किसानों को बीज संरक्षण के लिए सम्मानित किया और बताया कि सरकार इसके लिए 15 लाख रुपये तक की सहायता देती है। चौहान ने कहा कि किसानों को अधिनियम की जानकारी बढ़ानी होगी और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्रियों ने भी स्थानीय बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर जोर दिया।

नई दिल्ली के पूसा कैंपस में आयोजित ‘पादप जीनोम संरक्षक पुरस्कार समारोह’ और पीपीवीएफआरए अधिनियम, 2001 के रजत जयंती समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और संगठनों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में देशभर से आए कई किसान, संस्थान और संगठनों को बीज संरक्षण और पारंपरिक किस्मों को सहेजने के लिए पुरस्कृत किया गया।

बीज ही किसान की सबसे बड़ी पूंजी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा बहुत पुरानी है और बीज ही किसान की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा, “नई किस्मों को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन पुरानी किस्मों को बचाना भी उतना ही अहम है। दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।” चौहान ने यह भी बताया कि बीज संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 15 लाख रुपये तक की राशि देने का प्रावधान रखती है।

उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में पीपीवीएफआरए (Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Authority) ने शानदार काम किया है। इस अधिनियम के तहत किसानों के पारंपरिक ज्ञान, बीजों की स्थानीय किस्मों और प्रजनकों के अधिकारों की रक्षा की जाती है।

ये भी पढ़ें - 86% किसान अब भी तकनीक से वंचित, रिपोर्ट ने सुझाए बड़े सुधार के रास्ते

पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने माना कि अधिनियम की जानकारी अभी भी किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिनियम में नए सुझावों और आवश्यक सुधारों को शामिल किया जाएगा ताकि किसानों तक इसके वास्तविक लाभ पहुंच सकें।

इस मौके पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर ने भी किसानों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि स्थानीय बीजों, मडुआ और अन्य पारंपरिक फसलों के संरक्षण की दिशा में और काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम में कृषि मंत्रालय के सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट, और पीपीवीएफआरए के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन महापात्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

क्या है पीपीवीएफआरए अधिनियम?
पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) की स्थापना 2001 में की गई थी। इसका उद्देश्य नई पौध किस्मों के प्रजनकों को अधिकार देना और किसानों के पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करना है। यह प्राधिकरण किसानों को बीज बचाने, बोने और पुनः उपयोग करने का अधिकार देता है, जिससे कृषि जैव विविधता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।

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