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बजट 2026–27 से पहले कृषि क्षेत्र की बड़ी माँगें, निवेश और तकनीक पर ज़ोर

बजट 2026–27 से पहले कृषि विशेषज्ञ और उद्योग जगत सरकार से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जलवायु-सहिष्णु खेती और तकनीक में अधिक निवेश की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि देश की 45% आबादी को रोज़गार देती ह

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Pooja Rai· Correspondent

16 जनवरी 2026· 4 min read

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बजट 2026–27 से पहले कृषि क्षेत्र की बड़ी माँगें, निवेश और तकनीक पर ज़ोर

बजट 2026–27 से पहले कृषि क्षेत्र की बड़ी माँगें, निवेश और तकनीक पर ज़ोर

बजट 2026–27 से पहले कृषि विशेषज्ञ और उद्योग जगत सरकार से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जलवायु-सहिष्णु खेती और तकनीक में अधिक निवेश की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि देश की 45% आबादी को रोज़गार देती है, लेकिन अर्थव्यवस्था में इसका योगदान कम है। डेयरी, सिंचाई, भंडारण, रिसर्च और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे AGRISTACK को मज़बूत कर कृषि को कल्याण नहीं बल्कि आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाया जा सकता है।

वित्त वर्ष 2026–27 के बजट से पहले कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के नेता और विशेषज्ञ सरकार से कृषि में डिजिटल ढाँचे, जलवायु-सहिष्णु खेती और आधुनिक तकनीक में ज़्यादा निवेश की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि ऐसा क्षेत्र है, जिसमें देश की लगभग 45 प्रतिशत आबादी को रोज़गार मिलता है, लेकिन इसका योगदान अर्थव्यवस्था में 20 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में बजट 2026–27 कृषि को केवल कल्याणकारी क्षेत्र नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का मजबूत इंजन बनाने का एक बड़ा अवसर है।

कृषि अब सिर्फ़ कल्याण नहीं, विकास का माध्यम
बिज़नेस स्टैण्डर्ड की एक खबर के मुताबिक EY इंडिया में कृषि एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़े विशेषज्ञ अमित वात्स्यायन का कहना है कि अब कृषि को केवल किसानों की मदद तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह उत्पादकता बढ़ाने, रोज़गार पैदा करने, ग्रामीण मांग मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला क्षेत्र बन सकता है। सही नीतियों और निवेश से कृषि देश की आर्थिक ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकती है।

हरित ढाँचा और जलवायु-सुरक्षित खेती पर ज़ोर
अमित वात्स्यायन ने कहा कि सरकार को माइक्रो इरिगेशन, जल संरक्षण, वाटरशेड मैनेजमेंट, भूजल रिचार्ज और सोलर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि साधनों में निवेश बढ़ाना चाहिए। इससे न सिर्फ़ खेती जलवायु बदलाव के असर से सुरक्षित होगी, बल्कि किसानों की आय स्थिर होगी और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी।

डेयरी सेक्टर को बजट से बड़ी उम्मीदें
डेयरी क्षेत्र की बात करें तो हेरिटेज फूड्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ब्रह्मणी नारा ने बताया कि सितंबर 2025 में GST में किए गए सुधारों के बाद संगठित डेयरी सेक्टर को फायदा मिला है। इससे पनीर, चीज़, घी और मक्खन जैसे हाई-प्रोटीन और हेल्थ से जुड़े उत्पादों की माँग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन और नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन के तहत अब तक 3 लाख से ज़्यादा किसान संगठित डेयरी सिस्टम से जुड़ चुके हैं।

डेयरी सेक्टर की तीन माँगे
बजट को लेकर उनकी तीन प्रमुख माँगें हैं—पहला पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण पशु आहार और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन पर सब्सिडी। दूसरा पशु चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए वेटरनरी कॉलेजों की संख्या बढ़ाना, क्योंकि देश में ज़रूरत 1.1 से 1.2 लाख डॉक्टरों की है, जबकि उपलब्ध सिर्फ़ 68 हजार हैं और तीसरा खासकर महिला उद्यमियों के लिए मिनी डेयरी यूनिट्स पर ज़्यादा पूंजी सब्सिडी।

भंडारण, रिसर्च और बीजों में निवेश ज़रूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भंडारण, लॉजिस्टिक्स और कृषि अनुसंधान में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को बढ़ावा देना होगा। इसके साथ ही दालों और पोषण वाली फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए बेहतर बीज प्रणाली पर भी निवेश ज़रूरी है।

ये भी पढ़ें - नकली और जहरीले कीटनाशकों पर सरकार का कड़ा वार, जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान

डिजिटल खेती की दिशा में बड़ा कदम
MapMyCrop के संस्थापक और CEO स्वप्निल जाधव ने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान कर्ज़ व्यवस्था के बिना आधुनिक खेती संभव नहीं है। ड्रोन, IoT सेंसर और AI आधारित तकनीकें खेती की पैदावार बढ़ाने, पानी और खाद की बचत करने और जलवायु जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं। इसके लिए उन्होंने लक्षित सब्सिडी, मज़बूत PPP मॉडल और रिसर्च पर टैक्स छूट की माँग की।

संरचनात्मक सुधार भी जरूरी
BDO इंडिया के विशेषज्ञ सौम्यक बिस्वास ने बताया कि छोटे और बिखरे हुए खेत, सहयोगी क्षेत्रों में कम निवेश, फसल नुकसान और रिसर्च की कमी जैसी समस्याएँ अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जलवायु-स्मार्ट खेती, पशुपालन और मत्स्य पालन को मज़बूती, FPOs को बाजार से जोड़ना और किसानों को बागवानी, दालें और तिलहन जैसी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना ज़रूरी है।

AGRISTACK से बदलेगी खेती की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AGRISTACK को सही ढंग से लागू किया गया, तो यह डिजिटल खेती की रीढ़ बन सकता है। इससे किसान डेटा, भूमि रिकॉर्ड, कर्ज़, बीमा, सलाह और बाजार को एक मंच पर लाया जा सकेगा, जिससे लागत घटेगी और निजी निवेश बढ़ेगा।सब मिला के बजट 2026–27 से कृषि क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें हैं। अगर सरकार तकनीक, जलवायु सुरक्षा और निवेश पर फोकस करती है, तो कृषि न सिर्फ़ किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे सकती है।

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