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प्राकृतिक खेती ही भविष्य: कृषि मंत्री

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान असली वैज्ञानिक हैं और उनकी देसी तकनीकों पर रिसर्च होगी। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ा है, लेकिन रासायनिक खाद और कीटनाशकों की वजह से खेती महंगी हो गई है,

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Pooja Rai· Correspondent

9 दिसंबर 2025· 3 min read

प्राकृतिक खेती ही भविष्य: कृषि मंत्री

प्राकृतिक खेती ही भविष्य: कृषि मंत्री

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान असली वैज्ञानिक हैं और उनकी देसी तकनीकों पर रिसर्च होगी। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ा है, लेकिन रासायनिक खाद और कीटनाशकों की वजह से खेती महंगी हो गई है, इसलिए प्राकृतिक और संतुलित खेती जरूरी है। उद्योग ने कहा कि किसानों को बेहतर तकनीक और विकल्प देने होंगे ताकि उनकी उपज और आय बढ़ सके।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की तारीफ करते हुए कहा कि किसान असली "प्रैक्टिकल साइंटिस्ट" हैं। उन्होंने बताया कि बिहार के दौरे के दौरान लीची किसान उन्हें मिले और बताया कि उन्होंने लीची के गुच्छों पर कुछ खास चीज लगाकर उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने का तरीका खोज लिया है। मंत्री ने कहा कि ऐसे देसी तरीकों पर अब वैज्ञानिक रिसर्च की जाएगी ताकि इन्हें और बेहतर बनाया जा सके और बड़े स्तर पर अपनाया जा सके।

खेती बढ़ी, लेकिन लागत भी बढ़ गई: मंत्री
दिल्ली में आयोजित PHDCCI के कार्यक्रम में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2014 के बाद से देश में कृषि उत्पादन तेजी से बढ़ा है, लेकिन साथ ही किसानों की खेती लागत भी बहुत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अगर उत्पादन और खर्च साथ-साथ बढ़ते रहेंगे तो किसानों को फायदा कैसे होगा? मंत्री ने बताया कि किसान ज़्यादा उत्पादन के लिए खाद और कीटनाशक ज़्यादा मात्रा में इस्तेमाल करते हैं, जिससे लागत इतनी बढ़ जाती है कि बंपर पैदावार के बाद भी मुनाफा बहुत कम बचता है। सरकार लागत कम करने के लिए कई कदम उठा रही है।

ये भी पढ़ें - आने वाले 5 साल में डेयरी किसानों की आय 20% बढ़ेगी: अमित शाह

रासायनिक खादों का सीमित उपयोग ज़रूरी
मंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि धरती को इतना मत निचोड़ें कि वह एक दिन उत्पादन देना बंद कर दे। उन्होंने कहा कि जरूरत से ज़्यादा रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता को खत्म कर रहा है।उन्होंने सलाह दी कि प्राकृतिक खेती, जैविक (ऑर्गेनिक) खेती या कम से कम रासायनिक खादों का संतुलित उपयोग को अपनाना होगा। सरकार इस दिशा में काम कर रही है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती योग्य मिट्टी बची रहे।

किसानों को विकल्प देना जरूरी: कृषि उद्योग
कार्यक्रम में मौजूद PHDCCI एग्री बिजनेस कमेटी के चेयरमैन आर. जी. अग्रवाल ने कहा कि किसानों को खुद तय करने देना चाहिए कि उनके लिए क्या बेहतर है। उन्होंने कहा कि भारत में ज़मीन छोटी-छोटी है, इसलिए किसानों को अभी के समय में कीटनाशक जैसे विकल्पों की जरूरत है जिससे उनकी फसलें कीटों और बीमारियों से बच सकें।उन्होंने कहा कि किसानों ने हमेशा इस देश के लिए काम किया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें बेहतर तकनीक, ज्ञान और सहायता दें ताकि वे अपनी पैदावार और आय बढ़ा सकें।

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