Skip to content
News Potli
एग्री बुलेटिन

ज्यादा उत्पादन, कम लागत, सही दाम, आपदा में राहत, कृषि में विविधता और धरती को बचाना, केंद्र सरकार की हैं ये छह प्राथमिकताएं

कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, उत्पादन का सही दाम देना, प्राकृतिक आपदा के लिए राहत राशि देना, कृषि में विविधता और वैल्यू एडिशन इसके साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी धरती सुरक्षित रहे

NP

Pooja Rai· Correspondent

3 अगस्त 2024· 4 min read

ज्यादा उत्पादन, कम लागत, सही दाम, आपदा में राहत, कृषि में विविधता और धरती को बचाना, केंद्र सरकार की हैं ये छह प्राथमिकताएं

ज्यादा उत्पादन, कम लागत, सही दाम, आपदा में राहत, कृषि में विविधता और धरती को बचाना, केंद्र सरकार की हैं ये छह प्राथमिकताएं

कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, उत्पादन का सही दाम देना, प्राकृतिक आपदा के लिए राहत राशि देना, कृषि में विविधता और वैल्यू एडिशन इसके साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी धरती सुरक्षित रहे, इसके लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास करना ये हमारी छह प्राथमिकताएं हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं के बारे शुक्रवार की राज्यसभा में जानकारी दी।

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि एंव किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का DNA ही किसान विरोधी है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहली बार नहीं है, हमेशा से ही कांग्रेस की प्राथमिकताएं गलत रही हैं।शिवराज ने कहा, 'पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी ने रूस का मॉडल देखकर भारत में रूसी मॉडल लागू करने की बात कही थी, लेकिन उन्हें यह भी नहीं पता था कि भारत की कृषि परिस्थिति रूस से अलग हैं।’
कृषि में अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाना, कृषि में लागत कम करना, उत्पादन का सही दाम देना, प्राकृतिक आपदा के लिए राहत राशि देना, कृषि का विविधीकरण और वैल्यू एडिशन, इसके साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी धरती सुरक्षित रहे, इसके लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास करना हमारी छह प्राथमिकताएं हैं।

बजट पर कृषि मंत्री ने कहा
कृषि मंत्री ने कहा कि सदन में विपक्ष द्वारा कहा गया कि कृषि का बजट कम कर दिया गया, लेकिन मैं यह बताना चाहता हूं कि कृषि के लिए बजट आवंटन 2013-14 में केवल 27,663 करोड़ रुपया था। 2024-25 में यह बढ़कर 1,32,470 करोड़ रुपया हो गया। यह केवल कृषि विभाग का बजट है। यदि कृषि से संबंधित विभागों को जोड़ दिया जाए, फर्टिलाइजर की सब्सिडी भी जोड़ दी जाए तो 1,75,446.55 करोड रुपए और जुडे़गा।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अभी इसमें सिंचाई का बजट नहीं जोड़ा गया है। जल शक्ति मंत्रालय अलग है। अगर उत्पादकता बढ़ानी है तो पहली प्राथमिकता होगी किसानों के सूखे खेत में पानी पहुंचाना। कृषि मंत्री ने सदन को बताया, "आज मैं कहना चाहता हूं कि सिंचाई की व्यवस्था में वर्षों तक कांग्रेस सरकार रही है। कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। इसके अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। मध्य प्रदेश में ही देखा जाए तो कांग्रेस, राजा, नवाब, अंग्रेज सबने मिलकर 7.5 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की व्यवस्था की।लेकिन, जब हमारी सरकार आई तो हमने उसे बढ़ाकर 47.5 लाख हेक्टेयर किया। इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर करने पर हमारा काम चल रहा है।

ये भी पढ़ें -देश में पशु चारे की 23 से 32 फीसदी तक की कमी, केंद्र सरकार ने कहा- राज्‍यों के साथ म‍िलकर दूर करेंगे कमी

109 नए बीजों की क्वालिटी जारी होगी

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यसभा में कहा कि मैं बताना चाहता हूं, सिंचाई के अच्छे प्रयत्नों के कारण आईसीएआर (ICAR) ने उत्तम बीज बनाए हैं। हम 109 नए बीजों की क्वालिटी जारी करने वाले हैं। उपज बढ़ानी है तो उत्तम बीज चाहिए, जलवायु अनुकूल बीज चाहिए। बेहतर सिंचाई चाहिए और 10 साल से मोदी जी के नेतृत्व में यह हो रहा है। आप देखेंगे 2023-24 में खाद्यान्न का उत्पादन 329 मिलियन टन तक पहुंच गया है। अगर हम बागवानी देखें तो 23-24 में बागवानी का उत्पादन 352 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

दलहन -तिलहन पर कहा

कृषि मंत्री ने कहा कि हम यहां रुकेंगे नहीं, पहले दलहन-तिलहन का उत्पादन प्राथमिकता नहीं थी। आज हमें कहते हुए गर्व है कि दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी तेजी से काम हो रहा है और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। हम देश के करोड़ों किसानों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सस्ती खाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार देती रहेगी। 2004-5 से 13-14 तक 6 लाख 29 हजार मीट्रिक टन दलहन खरीदा गया। लेकिन, यह सरकार है, जिसने वर्ष 2014-15 से 23-24 तक 1 करोड़ 70 लाख मीट्रिक टन दलहन खरीदा। मैं यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि सरकार किसानों को समर्थन देना जारी रखेगी।

पिछली सरकारों पर ये कहा

शिवराज सिंह चौहान ने नेहरू और इंदिरा गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि नेहरू जी के कार्यकाल में कृषि की परिस्थिति इतनी खराब थी कि 17 सालों तक भारत के लोगों को अमेरिका का सड़ा हुआ लाल गेहूं खाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के शासन काल में किसानों से जबरन वसूली की गई थी। उनके शासन में अगर किसी किसान का 2 क्व‍िंटल गेंहूं होता था,तो उसमें से 1 क्व‍िंटल वसूला जाता था। राजीव गांधी ने भी किसानों के हक में कोई फैसला नहीं लिया, ना ही नरसिम्हा राव के सरकार में ही ऐसा कोई उल्लेखनीय फैसला आया था।

ये देखें -

NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min