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चीनी उत्पादन में 22% की बढ़ोतरी, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग क्यों कर रही है ISMA?

2025–26 सीजन में 15 जनवरी तक देश का चीनी उत्पादन 22% बढ़कर 1.59 करोड़ टन पहुँच गया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, चीनी के दाम लागत से नीचे जाने

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Pooja Rai· Correspondent

21 जनवरी 2026· 3 min read

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चीनी उत्पादन में 22% की बढ़ोतरी, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग क्यों कर रही है ISMA?

चीनी उत्पादन में 22% की बढ़ोतरी, न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग क्यों कर रही है ISMA?

2025–26 सीजन में 15 जनवरी तक देश का चीनी उत्पादन 22% बढ़कर 1.59 करोड़ टन पहुँच गया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, चीनी के दाम लागत से नीचे जाने और गन्ने की कीमतें बढ़ने से मिलों की हालत कमजोर हो रही है, जिससे किसानों को भुगतान में देरी का खतरा बढ़ गया है। ISMA ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को बढ़ाने की मांग की है।

2025–26 सीजन में देश का चीनी उत्पादन 15 जनवरी तक 22 प्रतिशत बढ़कर 1.59 करोड़ टन पहुँच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह उत्पादन 1.30 करोड़ टन था। यह जानकारी इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने दी है।चीनी उत्पादन में यह बढ़ोतरी गन्ने की बेहतर उपलब्धता और अच्छी पैदावार के कारण हुई है। भारत में चीनी सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है।

ज्यादा मिलें चालू
ISMA के अनुसार, 15 जनवरी तक 518 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि पिछले साल इसी समय 500 मिलें काम कर रही थीं। इससे भी उत्पादन बढ़ने में मदद मिली है।

राज्यों में उत्पादन की स्थिति
प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में इस सीजन उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन में सबसे ज्यादा 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जहां उत्पादन पिछले साल के 4.27 मिलियन टन से बढ़कर 6.45 मिलियन टन पहुंच गया। वहीं उत्तर प्रदेश में उत्पादन 4.28 मिलियन टन से बढ़कर 4.6 मिलियन टन हो गया है। इसी तरह कर्नाटक में भी चीनी उत्पादन में इजाफा हुआ है और यह 2.75 मिलियन टन से बढ़कर 3.1 मिलियन टन पर पहुंच गया है।

गन्ने की पैदावार और उत्पादकता में सुधार
ISMA का कहना है कि इस सीजन में गन्ने की उपलब्धता पर्याप्त रही, खेतों में उत्पादकता बेहतर हुई और प्रमुख राज्यों में मिलों का संचालन भी सुचारु रहा, जिससे चीनी उत्पादन में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

ये भी पढ़ें - अमेरिकी दालों पर 30% शुल्क, भारत–US ट्रेड डील पर बढ़ा तनाव

मिलों की आर्थिक हालत पर चिंता
हालांकि, ISMA ने यह भी चेतावनी दी है कि गन्ने की कीमतें बढ़ रही हैं और चीनी के दाम घट रहे हैं।इस वजह से चीनी मिलों की आर्थिक हालत पर दबाव बढ़ रहा है और किसानों को गन्ने का भुगतान देर से होने लगा है।

चीनी के दाम लागत से नीचे
महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी का एक्स-मिल भाव करीब ₹3,550 प्रति क्विंटल रह गया है, जो उत्पादन लागत से काफी कम है।ISMA के अनुसार, जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा और चीनी का भंडार बढ़ेगा, वैसे-वैसे गन्ना भुगतान का बकाया और बढ़ सकता है, अगर बाजार के हालात ऐसे ही बने रहे।

MSP बढ़ाने की मांग
चीनी उद्योग संगठन ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द संशोधन करने की मांग की है, ताकि मिलों की आर्थिक हालत सुधरे और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

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