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गन्ना चुस्की प्रोडक्ट तैयार करने वाला हरियाणा का किसान

करनालः करनाल में सेलिब्रेटिंग फार्मर ग्रुप से जुड़े किसान मनदीप पहल 2015 से आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। उन्होनें आस पास के कई दूसरे जैविक किसान के साथ मिलकर करनाल में ही जैविक उत्पाद के लिए सेलिंग स्टोर

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Ashish· Correspondent

23 सितंबर 2023· 4 min read

गन्ना चुस्की प्रोडक्ट तैयार करने वाला हरियाणा का किसान

गन्ना चुस्की प्रोडक्ट तैयार करने वाला हरियाणा का किसान

करनालः करनाल में सेलिब्रेटिंग फार्मर ग्रुप से जुड़े किसान मनदीप पहल 2015 से आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। उन्होनें आस पास के कई दूसरे जैविक किसान के साथ मिलकर करनाल में ही जैविक उत्पाद के लिए सेलिंग स्टोर खोला है। इस स्टोर की खास बात ये ही कि यहां मिलती है गन्ने के रस से बनी आइसक्रीम जिसे स्थानीय लोग गन्ना चुस्की भी कहते हैं। गन्ना चुस्की एक नया उत्पाद है और इसी कारण से वो लोगो के बीच पहचाने जा रहे हैं।

कैसी हुई स्टोर की शुरूआत

गन्ने की चुस्की, गन्ने की चाय, गन्ने की चटनी और बहुत कुछ यहां है जो बेहद खास और सेहतमंद है। इस दुकान में मौजूद सभी प्रोडक्ट केमिकल फ्री हैं। ये दुकान एक मुहिम का हिस्सा जिसे हरियाणा के कुछ युवा किसान मिलकर चलाते हैं, जिसमें देश के कई राज्यों के किसान के आर्गेनिक उत्पाद बिकने के लिए भी आते हैं। जैविक खेती खासकर गन्ने के ऑर्गेनिक बाई प्रोडक्ट बनाने की शुरुआत करने वाले करनाल के मनदीप पहल इस शुरुआत के पीछे की कहानी बताते हैं। कैंसर से पिता की मौत के बाद मनदीप पहल को भी बोन टीबी हो गया। लाखों रुपए खर्च करने और लंबे इलाज के बाद उनकी जान बची तो उन्होंने केमिकल वाली खेती और खाने से तौबा कर ली। मनदीप पहले से जैविक खेती करने लगे थे लेकिन उसमें लागत नहीं निकल रही थी इसलिए 2018 में उन्होंने किसानों के साथ मिलकर गन्ने के जूस के प्रोडक्ट बनाने शुरु कर दिए।

ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं प्रोडेक्ट-

मनदीप एक युवा किसान है और किसानों के साथ साथ वो नई तकनीकी से भी जुड़े रहते हैं। अपने प्रोडक्ट को सिर्फ स्टोर तक ही सीमित नहीं रखा है। वो व्हाट्सएप के जरिए भी ऑनलाइन आर्डर लेते हैं। वो कहते हैं इससे हम लोग ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंच पाते हैं और साथ ही नए जैविक किसानों से भी जुड़ने में हेल्प मिलती है।

नोटः मनदीप का व्हाट्सएप नंबर वीडियो में है।

वीडियो स्टोरी; वीडियो में है मनदीप से संपर्क करने का तरीका

स्टोर में मिलने प्रोडक्ट

दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर बसे करनाल में मनदीप और उनके साथ किसान इसी स्टोर के जरिए गन्ने के जूस से बनी बहुत सी चीजे बेचते हैं। गन्ने से बनी चटनी, गन्ना हर्बल टी, गन्ने का सिरका, गन्ना स्लश, गन्ना के जूस के फ्रोजन ब्लाक्स जिसे 6 महीनें तक यूज किया जा सकता है। गन्ने से बनी आइसक्रीम जिसे आम बोल चाल की भाषा में गन्ना चुस्की भी कहा जाता है।

गन्ना चुस्की

गन्ना ईमली चटनी

20-80 का फार्मूला अपनाते हैं मनदीप और उनके दोस्त

मनदीप बताते है, जैविक और नैचुरल फार्मिंग से बने प्रोडक्ट अक्सर महंगे होते हर आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाते हैं, इसलिए उन्होंने बिजनेस का नया फार्मूला अपनाया। वो गन्ने के बने प्रोसेस्ड उत्पादों को अच्छी कीमत पर बेचते हैं, जबकि इन्हीं किसानों द्वारा उगाए गए धान-गेहूं,सरसों का तेल, आटा, हल्दी, शहद आदि रोज उपयोग आने वाले खाद्य पदार्थों की कीमत संतुलित रखी ताकि वो आम आदमी के बजट में आ सके।

मनदीप और उनके साथी किसानों ने इस काम मुहिम को आगे बढ़ाने और कारोबार के लिए फार्मर इंस्टरेस्ट ग्रुप बनाया है। जिसमें गन्ने और दूसरे उत्पादों का रेसियो 80-20 का होता है। 80 फीसदी अनाज की और मसालों की खेती होगी और 20 प्रतिशत एरिया में गन्ने की खेती की जाएगी। मनदीप बताते हैं सभी किसान जो गन्ने की जैविक खेती करते हैं सबने मिलकर खेत में ही एक प्रोसेसिंग यूनिट तैयार कर ली है। गन्ना कटता है वहीं खेती में ही उसकी पेराई करके पैक कर दिया जाता है और डीप फ्रीज में स्टोर कर लिया जाता है। वहीं जूस के पैकेट या फ्रोजेन ब्लाक्स शॉप में ले आए जाते हैं।

शरबत

गन्ना जूस ब्लाक्स

फूड प्रोसिंग के बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए, किसानों को सही उत्पाद दिलाने, सही तरीके से प्रोसेसिंग करने के लिए सभी किसान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से ट्रेनिंग भी लेते हैं। मार्केटिंग के नए तरीके भी खोजते है। मनदीप और उनके साथी नई तकनीकी से जुड़े हुए समय समय पर ट्रैनिंग और मीटिंग भी करते हैं।

मनदीप बताते हैं, इस काम से कमाई तो सबको हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी संतुष्टि इस बात की है मैं किसी को जहर नहीं बेच रहा। ये सेहतमंद प्रोडक्ट है जो किसान को सही कीमत दिला रहे और खाने वाले सही स्वाद और सेहत।

आर्गेनिक खेती करने वाले किसान अक्सर अपनी फसल की सही कीमत पाने के लिए परेशान रहते हैं। सरकारी और निजी खेती संस्थाएं आर्गेनिक फसल उत्पाद पर ज्यादा जोर देती है। ऐसे में किसान को जरूरत होती है सही जानकारी और मार्केट में चल रही डिमांड के बारे में।

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