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कृषि उत्पाद समझौते से बाहर, किसानों को नहीं होगा नुकसान: कृषि मंत्री चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है और किसी भी अहम कृषि उत्पाद को इसमें शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने मांस, डे

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Pooja Rai· Correspondent

9 फ़रवरी 2026· 3 min read

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कृषि उत्पाद समझौते से बाहर, किसानों को नहीं होगा नुकसान: कृषि मंत्री चौहान

कृषि उत्पाद समझौते से बाहर, किसानों को नहीं होगा नुकसान: कृषि मंत्री चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है और किसी भी अहम कृषि उत्पाद को इसमें शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने मांस, डेयरी, अनाज, दालें, फल-सब्जियां और मसालों समेत कई उत्पादों पर अमेरिका को कोई छूट नहीं दी है। उन्होंने कांग्रेस के “सरेंडर” वाले आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता देशहित में संतुलित बातचीत से हुआ है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सकारात्मक बातचीत के जरिए हुआ है और इसमें कृषि क्षेत्र के हितों की पूरी तरह सुरक्षा की गई है। उन्होंने साफ किया कि किसानों के लिए जरूरी किसी भी कृषि उत्पाद को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है।

'देशहित में संतुलित समझौता'
भोपाल में मीडिया से बातचीत में चौहान ने कहा कि इस समझौते में ऐसा कोई भी उत्पाद शामिल नहीं है, जिससे भारतीय किसानों को थोड़ा सा भी नुकसान हो। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई “सौदेबाज़ी” नहीं है, बल्कि देशहित में संतुलित और रचनात्मक बातचीत के बाद हुआ समझौता है।उन्होंने कहा कि इस समझौते से दुनिया को संदेश गया है कि भारत की नीति समझौता करने की नहीं, बल्कि अपने हितों की रक्षा करने की है। सरकार ने कूटनीति, विकास और किसानों की गरिमा—तीनों का ध्यान रखा है।

कृषि मंत्री ने क्या दावा किया?
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए चौहान ने कहा कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस किसानों को वैश्विक बाजार से नहीं जोड़ पाई और न ही अर्थव्यवस्था को स्थिर कर सकी। उन्होंने दावा किया कि भारत अब तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।कांग्रेस ने इस समझौते को “डील नहीं, सरेंडर” बताया था और कहा था कि इससे भारत अमेरिकी उत्पादों का बाजार बन जाएगा, जिससे किसानों और छोटे उद्योगों को नुकसान होगा।

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जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पाद को नहीं मिलेगा प्रवेश
इस पर जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि भारत में किसी भी जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पाद को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने इसे बड़ा फैसला बताते हुए कहा कि इससे भारतीय खेती की शुद्धता बनी रहेगी और हमारी मिट्टी व बीज सुरक्षित रहेंगे।

इन कृषि उत्पादों पर कोई छूट नहीं
उन्होंने बताया कि मांस, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, फल-सब्जियां, दालें, तिलहन, एथेनॉल और तंबाकू जैसे कई कृषि उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। इसी तरह आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, जमी हुई सब्जियां और फलों को भी भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
डेयरी उत्पाद जैसे दूध, क्रीम, दही, मक्खन, घी, पनीर और चीज़ को भी समझौते से बाहर रखा गया है। इसके अलावा काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, मेथी, सरसों और अन्य मसालों को भी संरक्षण दिया गया है।

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