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कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक का नहीं IPM का इस्तेमाल करें, कम लागत में अच्छी पैदावार होगी

IPM यानी इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट या एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन वो तरीका है, जिसमें फसल को खर-पतवार, कीड़े और रोगों से बचाने के लिए ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं जिनकी लागत बहुत कम आती है।

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Thamir· Correspondent

17 फ़रवरी 2025· 2 min read

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कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक का नहीं IPM का इस्तेमाल करें, कम लागत में अच्छी पैदावार होगी

कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक का नहीं IPM का इस्तेमाल करें, कम लागत में अच्छी पैदावार होगी

IPM यानी इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट या एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन वो तरीका है, जिसमें फसल को खर-पतवार, कीड़े और रोगों से बचाने के लिए ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं जिनकी लागत बहुत कम आती है। इसमें किसान अपने खेतों में नीली-पीली चिपचिपी पट्टियां, blue sticky traps, pheromone trap, solar light trap, fruit fly trap , water Trap का इस्तेमाल करते हैं। इन विधियों का प्रयोग फल और सब्जी की खेती में जरुर करना चाहिए। इस विधि से उगाई गई सब्जियों में कैमिकल नही होता है और गुणवत्ता भी अच्छी होती है।

किसी भी फसल में कीड़े और बीमारियों का लगना आम बात है। और कीट नियंत्रण के लिए केमिकल का इस्तेमाल भी आम ही है।किसान भारी मात्रा में केमिकल फर्टिलाइजर तो इस्तेमाल कर ही रहे हैं साथ ही कीटनाशक, खरपतवार नाशक भी इस्तेमाल करते हैं। यह केमिकल ना सिर्फ़ आपके उत्पादन पर बुरा असर डालती है बल्कि इसका बुरा असर खेत की मिट्टी के साथ साथ हमारे पर्यावरण पर भी पड़ता है। जो टिकाऊ खेती के लिए सही नहीं है। इसीलिए ये ज़रूरी है कि किसान IPM का इस्तेमाल करे। इसमें लागत भी कम है और आपके उत्पाद, मिट्टी, सेहत सबके लिए अच्छा है।

ये भी पढ़ें -जैविक खेती के लिए 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद, राजस्थान के रामजी लाल से जानिए जैविक खेती से कमाई का तरीक़ा

अब देश भर में जागरूक किसान IPM का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उनको काफ़ी फ़ायदा भी हो रहा है। लागत कम लगने के साथ ही उनके उत्पाद बाज़ार में औरों के मुक़ाबले महँगे बिकते हैं, इससे उनकी आय भी बढ़ती है। सरकार भी इसको बढ़ावा दे रही है।
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