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कमाई वाला रहा टमाटर का सीजन - MP के किसान ने 5 एकड़ से कमाए 20 लाख रुपए, 40 लाख का है टार्गेट

शिवपुरी (मध्य प्रदेश)। किसानों के लिए टमाटर का यह सीजन अब तक मुनाफे वाला रहा है। टमाटर की बंपर पैदावार करने वाले मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के किसान काफी खुश हैं। 5 एकड़ में टमाटर उगाने वाले उमाचरण ध

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Thamir· Correspondent

16 दिसंबर 2024· 5 min read

कमाई वाला रहा टमाटर का सीजन - MP के किसान ने 5 एकड़ से कमाए 20 लाख रुपए, 40 लाख का है टार्गेट

कमाई वाला रहा टमाटर का सीजन - MP के किसान ने 5 एकड़ से कमाए 20 लाख रुपए, 40 लाख का है टार्गेट

शिवपुरी (मध्य प्रदेश)। किसानों के लिए टमाटर का यह सीजन अब तक मुनाफे वाला रहा है। टमाटर की बंपर पैदावार करने वाले मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के किसान काफी खुश हैं। 5 एकड़ में टमाटर उगाने वाले उमाचरण धाकड़ कहते हैं कि टमाटर से इतनी कमाई पहले कभी नहीं हुई।

“टमाटर ने इस बार मालामाल कर दिया है। मेरे पास ये पांच एकड़ टमाटर है। फूल आने के बाद, पहली ही तोड़ाई में शुरुआत के 7 दिनों में मुझे करीब 10 लाख रुपए कमाई हुई थी। मैंने इसी खेत से 1700-1800 रुपए प्रति कैरेट तक टमाटर बेचा है।” शिवपुरी जिले के खरई गांव के उमा चरण धाकड़ कहते हैं। एक कैरेट में 22-23 किलो तक टमाटर हो सकते हैं।

इंदौर-शिवपुरी हाईवे पर कोलारस के पास अपने खेतों में खड़े धाकड़ बताते हैं, “अभी तक मैं करीब 20 लाख का टमाटर बेच चुका हूं और अगर 500 रुपए प्रति कैरेट भी आगे टमाटर का रेट रहा, तो मुझे पूरे सीजन में 40 लाख रुपए की कमाई होगी।”

भारत में बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती होती है। मुख्य टमाटर उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब और हरियाणा शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में भी टमाटर की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। देश में पिछले एक दशक से औसतन 785-790 हजार हेक्टेयर में टमाटर उगाया जाता है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, 2023-24 में देश में करीब 21 लाख मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन हो सकता है, जो पिछले साल के मुकाबले 4 लाख टन ज्यादा है। देश में सबसे ज्यादा टमाटर मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में उगते हैं।

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एपिडा की एग्री एक्सचेंज रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021-22 में देश में सबसे ज्यादा टमाटर का उत्पादन मध्य प्रदेश में हुआ था। देश के कुल उत्पादन में एमपी का शेयर 14.63 प्रतिशत था, जबकि 10.92 प्रतिशत के साथ आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर पर था। मध्य प्रदेश में शिवपुरी, झबुआ, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सतना आदि में बड़े पैमाने पर किसान टमाटर उगाते हैं।

टमाटर के रेट की बात करें तो दिल्ली की मंडी में 2 दिसंबर को टमाटर का उच्चतम भाव 4400 रुपए प्रति क्विंटल था, जबकि न्यूनतम 1600 तक था। वहीं, 15 दिसंबर को यह रेट घटकर अधिकतम 3200 रुपए और न्यूनतम 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया।

शिवपुरी जिले के खरई गांव के उमा चरण धाकड़ कृषि से स्नातक और पेशे से डॉक्टर हैं। वह पिछले कई वर्षों से टमाटर की भी खेती कर रहे हैं। धाकड़ कहते हैं, “शिवपुरी में कोलारस के आसपास दर्जनों गांव इस सीजन में टमाटर ही उगाते हैं। इस साल मौसम, उत्पादन और रेट ने भी साथ दिया है, इसलिए हम खुश हैं। अभी तक रेट अच्छा था, कम कैरेट खेत से निकल रहे थे, अब पूरा खेत फूलों और फलों से भरा है, तो आगे फरवरी तक भी और उत्पादन होगा। अगर रेट कम भी हो जाएगा, तो ज्यादा उत्पादन से कम रेट का फर्क नहीं पड़ेगा।”

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न्यूज पोटली से बातचीत करते हुए उमा चरण कहते हैं, “मैंने अपने खेत में अधिराज, साहू और भाऊ किस्मों के टमाटर लगाए हैं। सबसे अच्छा उत्पादन साहू का रहा है।”

वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से टमाटर एक फल है, लेकिन इसे आमतौर पर सब्जी की तरह ही खाते हैं, फिर चाहे सलाद हो या फिर पकाकर। टमाटर विटामिन-ए और सी तथा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। अमूमन पूरे साल बाजार में इसकी मांग रहती है।

सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, उत्तर प्रदेश में भी किसान टमाटर की कमाई कर रहे हैं। दिसम्बर के पहले हफ्ते अपने खेत से 60 रुपए किलो टमाटर बेचने वाले बाराबंकी जिले के सरसौंदी गांव के किसान मयंक वर्मा कहते हैं, “यह सीजन सभी सब्जियों के लिए अच्छा गया है। मेरा टमाटर आज भी खेत से 60 रुपए किलो गया है, जो अच्छा रेट है।” मयंक के पास करीब एक बीघा (1 एकड़ = 5 बीघा) टमाटर है।

टमाटर के रेट से गदगद उमा चरण आगे कहते हैं, "बैंक जाता हूं तो मुझे टमाटर वाले के नाम से जानते हैं, क्योंकि बैंक वाले किसानों का उत्पादन अधिक होता है, वे खुश होते हैं। मेरी टमाटर का उत्पादन देखकर सब मुझे 'टमाटर वाला' कहते हैं।"

टमाटर की खेती:

उमा चरण के मुताबिक, ज्यादातर किसान बेड और मचान बनाकर टमाटर की खेती करते हैं। वह 3 फीट चौड़ा बेड बनाते हैं। एक बेड से दूसरे बेड की दूरी 6 फीट रखते हैं। वहीं, पौधे से पौधे की दूरी डेढ़ फीट रखी जाती है। टमाटर की लताओं को चढ़ाने के लिए वह बांस और रस्सी का प्रयोग करते हैं। टमाटर की खेती में पहले साल एक एकड़ पर एक लाख रुपये खर्च आते हैं, जबकि दूसरे साल यह खर्च 60 से 70 हजार रुपये तक हो जाता है, क्योंकि बांस आदि दूसरे साल खरीदने नहीं होते हैं।

धाकड़ के मुताबिक, उन्होंने अगस्त महीने में रोपाई की थी और मार्च तक यह फसल चलेगी। अगर रेट सही रहा तो वह इसे अप्रैल तक भी ले जा सकते हैं। लेकिन रेट ज्यादा डाउन होने पर फरवरी में टमाटर काटकर तरबूज या प्याज की खेती कर सकते हैं।

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