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आम के पौधों में लगने वाले रोगों से बचाव के लिए ICAR ने दिया सुझाव

आम की बागवानी में लगने वाले रोगों से बचाव के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा ने रोगों से बचाव के उपाय बताए। इस तरह आम की बागवानी कर रहे किसान आम के पौधों में लगने वाले रोगों से बचा सकते है

NP

Thamir· Correspondent

12 फ़रवरी 2025· 3 min read

आम के पौधों में लगने वाले रोगों से बचाव के लिए ICAR ने दिया सुझाव

आम के पौधों में लगने वाले रोगों से बचाव के लिए ICAR ने दिया सुझाव

आम की बागवानी में लगने वाले रोगों से बचाव के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा ने रोगों से बचाव के उपाय बताए। इस तरह आम की बागवानी कर रहे किसान आम के पौधों में लगने वाले रोगों से बचा सकते हैं।

आम के पुष्प गुच्छ मिज की रोकथाम हेतु सलाह

ये भी पढ़ें - सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना(MIS)में किया बदलाव, फसलों की खरीद सीमा 20 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत की गई

आम के पुष्प और पुष्प गुच्छ मिज अत्यंत हानिकारक कीट हैं, जो आम की फसल को नुकसान पहुँचाते हैं। मिज कीट का प्रकोप जनवरी माह के अंत से जुलाई माह तक कोमल प्ररोह तनों और पत्तियों पर होता है, लेकिन अधिकतर क्षति बौर और नन्हें फलों पर होती है। कीट के लक्षण बौर के डंठल, पत्तियों की शिराओं या तने पर कत्थई या काले धब्बे के रूप में दिखाई देते हैं। धब्बे के मध्य में छोटा सा छेद होता है। प्रभावित बौर व पत्तियाँ टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए डायमेथोएट (30 प्रतिशत सक्रिय तत्व) 2.0 मि.ली. प्रति लीटर पानी के साथ स्टिकर (1 मि.ली. / ली. पानी) का छिड़काव करें।

आम के गुजिया कीट के प्रबंधन हेतु सलाह

आम के बागों में गुजिया कीट की गतिविधि जनवरी माह के पहले सप्ताह से प्रारंभ हो जाती है। यदि कीट बौर और पत्तियों तक पहुँच गया हो, तो इसके प्रबंधन के लिए पेड़ के तने के पास कीट नाशक धूल का बुरकाव करें। यदि कीट बौर और पत्तियों तक पहुँच चुका हो, तो कार्बोसल्फान 25 ई.सी. का 2 मिली./ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

आम के बौर का झुलसा रोग की रोकथाम हेतु सलाह

आम के बागों में बौर के विकास काल में फफूँदी द्वारा उत्पन्न झुलसा रोग का संक्रमण फूलों और अविकसित फलों के झड़ने का कारण बनता है। इस रोग का प्रकोप अधिक नमी और आर्द्रता के कारण बढ़ता है। इसे रोकने के लिए मेन्कोजेब + कार्बेन्डाजिम 0.2 प्रतिशत (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) या ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन + टेबूकोनाजोल (25 + 50 प्रतिशत) 0.025 प्रतिशत घोल (0.25 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।

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आम के भुनगा कीट की रोकथाम के लिए परामर्श

आम का भुनगा एक हानिकारक कीट है जो आम की फसल को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। यह बौर, कलियों और मुलायम पत्तियों पर अंडे देता है और शिशु अंडे से एक सप्ताह में बाहर आते हैं। शिशु और वयस्क कीट बौर, पत्तियों और फलों के मुलायम हिस्सों से रस चूसते हैं। इससे बौर नष्ट हो जाता है और फल गिर जाते हैं। इस कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड (0.3 मि.ली./ली. पानी) और स्टिकर (1 मि.ली./ली. पानी) का छिड़काव करें।

आम के तना भेदक कीट के प्रबंधन हेतु सलाह

आम के तना भेदक कीट से प्रभावित वृक्षों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं और शाखाएँ सूखने लगती हैं। कीटों के नियंत्रण के लिए बागों को साफ-सुथरा रखें और क्लोरपायरीफॉस 2.0 मि.ली./ली. पानी के घोल से तने पर छिड़काव करें।

आम के उकठा रोग के प्रबंधन हेतु सलाह

आम के पौधों में उकठा रोग का पहला लक्षण पत्तियों के मुर्झाने के रूप में दिखाई देता है। इसके नियंत्रण के लिए हेक्जाकोनाजोल 1.0 मि.ली. प्रति लीटर या थायोफेनेट मिथाइल / कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर का घोल बनाकर 25 लीटर प्रति वर्ग मीटर की दर से सिंचाई करें।

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